18 June 2024

Dhanbad :मुकद्दस महीने माहे रमजान चल रहा है जो पूरे तीस दिनों के रोजे उपवास कर मुस्लिम समाज अल्लाह को याद करते है और अपने गुनाहों से तोबा माफी मांगते है

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रोजेदारों ने पढ़ा जुम्में की नमाज

इस्लाम धर्म के पाक पवित्र रमजान महीने का आज तीसरा जुम्मा है.

धनबाद के मुश्लिम छेत्र के मस्जिदों में शुक्रवार को अकीदत और एहतराम के साथ नमाज अदा की गई. तीसरे जुम्मे पर धनबाद के स्टेशन रोड स्थित शबिली मस्जिद में नमाजियों की भीड़ उमड़ पड़ी. मुस्लिम धर्म में जुमे के दिन का विशेष महत्व होता है. इस दिन को नमाज के लिए और भी ज्यादा खास माना जाता है. जुमे के दिन ही हजरत आदम अलैहिस्सलम को जन्नत से दुनिया में भेजा गया था और जुमे को ही उन्होंने जन्नत में वापसी की थी.

शुक्रवार को कोयलांचल धनबाद के पुराना बाजार स्थित जामा मस्जिद, यतीम खाना मस्जिद, नूरी मस्जिद वासेपुर, नया बाजार, वासेपुर जब्बार मस्जिद, नया बाजार ईदगाह मस्जिद सहित कई अन्य मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ उमड़ी, रोजेदार सुबह से ही जुम्मे की तैयारी में जुटे हुए थे और दोपहर में जुम्मे की नमाज हुई तो एक-एक कर अपने नजदीकी मस्जिदों में नमाजियों की भीड़ जुटने शुरू हो गई.

पुराना बाजार स्थित जामा मस्जिद के इमाम मोहहमद निजामुद्दीन ने बताया कि माहे रमजान बरकत का महीना है जो रोजगार अल्लाह की इबादत करता है अल्लाह भी उसकी दुआ जरूर कबूल करते हैं रोजा रखने से इंसानियत आती है और अमीरों को भूख के महत्व के बारे में पता लगता है. उन्होंने बताया कि इस्लाम धर्म में रोज पांच टाइम की नमाज अदा की जाती है. नमाज अदा करना इस्लाम के मूल सिंद्धात में भी शामिल है. हालांकि जुमे के दिन की नमाज का बाकि दिनों से बहुत ही अधिक महत्व होता है. जुमे का दिन इस्लाम में बहुत ही खास माना जाता है यहीं वजह है कि इस दिन नमाज अदा करने का महत्व भी बढ़ जाता है. जुमे के दिन ही हजरत आदम अलैहिस्सलम को जन्नत से दुनिया में भेजा गया था और जुमे को ही उन्होंने जन्नत में वापसी की थी. जुमे की नमाज अदा करने से पिछले हफ्ते के पापों से मुक्ति मिलती है.

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