5 March 2024

NEWSTODAYJ : झारखंड राज्य के धनबाद जिले के बाघमारा विधानसभा के रहने वाले किरण महतो (झामुमो) वरिष्ठ नेता बाघमारा धनबाद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी में लिखा है कि राज्यपाल अपने पद की गरिमा को ताख पर रखते हुए चुप्पी साधे हुए है। 24 घंटे के बाद भी राज्यपाल का कहना है कि हम कानूनी सलाह ले रहे हैं। राज्यपाल कानूनी सलाह ले नहीं रहे है, बल्कि वह भी उस खेल के हिस्सा बने हुए है। वह भाजपा के आलाकमान के इशारे पर काम कर रहे हैं।

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देश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में बने रहने के लिए किस हद तक नीचे गिर सकती है, कहना मुश्किल है। भले ही सरकार के शीर्षस्थ नेता यह बयान देकर अपनी साफगोई का परिचय देते हों कि ईडी और सीबीआई जैसी सरकारी एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। उसमें सरकार का हाथ नहीं होता।यह सिर्फ कहने भर के लिए है कि इसमें जो भी कर रही है सरकारी जांच एजेंसियां कर रही है। परंतु भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने यहां की सारी सरकारी जांच एजेंसियों को सिर्फ अपना मोहरा बना लिया है। उन जांच एजेंसियों को हिम्मत नहीं है कि स्वतंत्र रूप से कोई भी काम कर सके। कोई भी कदम उठा सके। सरकार के किसी नेता के यहां बिना इशारा के छापेमारी कर सके। सरकारी जांच एजेंसियां तो वही करेगी, जहां सरकार उसका इस्तेमाल करना चाहेगी। ऐसा नहीं है कि भाजपा के नेता दूध के धुले हुए हैं। उनलोगों से भ्रष्ट तो कोई हो ही नहीं सकता है। फिर भी ईडी और सीबीआई जैसी सरकारी जांच एजेंसियां उन्हें छुएगी तक नहीं। ईडी, सीबीआई जैसी जांच एजेंसियां सिर्फ विपक्ष के नेताओं के घर ही छापेमारी करेगी। पुख्ता सबूत न भी मिलेगा, फिर भी करेगी। जैसा कि भाजपा सरकार में यह सबकुछ देखा जा रहा है। इससे आम लोगों को भी यह लगने लगता है कि लोग भ्रष्ट हैं, तब तो ईडी और सीबीआई छापेमारी कर रही है।जिसका लाभ भाजपा इस रूप में प्रचारित-प्रसारित कर उठाती रही है कि देखिए, विपक्ष के नेता कितने भ्रष्ट हैं। विपक्ष के नेताओं के पास कितनी अवैध संपत्तियां हैं। ताकि जनता के बीच विपक्षी नेताओं की साख गिर सके और जिसका लाभ भाजपा वालों को मिल सके। ये सबकुछ भाजपा के राजनीतिक षड्यंत्र का परिणाम है।
भाजपा अपने खेल से विपक्ष को कमजोर कर देना चाहती

भारतीय जनता पार्टी की सरकार की नीचता किसी से छिपा हुआ नहीं है। इसका जीता जागता उदाहरण यह है कि कभी प्रधानमंत्री ताल ठोककर महाराष्ट्र में कहा करते थें कि अजीत पवार 70 करोड़ के भ्रष्टाचारी हैं। उन्हें जेल की हवा खाना तय है। परंतु जैसे ही अजीत पवार ईडी के भय से भाजपा साथ हो जाते हैं। वैसे ही ईडी का मामला तो खत्म हो ही जाता है, सरकार में उपमुख्यमंत्री का ओहदा भी दे दिया जाता है। ऐसे नारायण राणे, छगन भुजबल, हेमंत विश्वशर्मा सहित अनेक उदाहरण भरे पड़े हैं। जो विपक्ष में थे, तो ईडी और सीबीआई के रडार पर थे। जब भाजपा के साथ आ गये, तो मंत्री बनकर सरकार की शोभा बढ़ा रहे हैं। भाजपा सरकार अपने ऐसे ही खेल से विपक्ष को कमजोर कर देना चाहती है।झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इंडिया गठबंधन के साथ मजबूती के साथ जब खड़े दिखे, तो भाजपा सरकार को नागवार गुजरा। क्योंकि उसे झारखंड में अधिक से अधिक लोक सभा की सीटें चाहिए।जो हेमंत सोरेन के अड़ियल रवैया के सामने संभव नहीं दिख रहा था। जबकि इसके पहले भाजपा ने हेमंत सोरेन को इंडिया गठबंधन छोड़ने के लिए दबाव भी बनाया था कि आप इंडिया गठबंधन छोड़कर हमारे गठबंधन के साथ आ जाएं अन्यथा इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। जब हेमंत सोरेन ने अपने स्वाभिमान का परिचय दिया और उनके इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो ईडी का भय दिखाया। जब हेमंत सोरेन उससे भी नहीं डरे, तो ईडी के माध्यम से उन्हें गिरफ्तार करवा लिया। जबकि गिरफ्तारी के पहले हेमंत सोरेन ने यह साफ कहा कि यह सबकुछ एक राजनीतिक साज़िश के तहत् किया करवाया जा रहा है। “ मैं शिबू सोरेन का बेटा हूं, झुकूंगा नहीं। संघर्ष करना हमारे खून में है।“ कहा जाता है कि एक जमीन की लेन-देन के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया है। जिस पर हेमंत सोरेन का कहना है कि मुझे बेवजह तबाह किया जा रहा है। उसमें कितनी सच्चाई है, वह तो एक दिन सामने आ ही जाएगी। इस पर हेमंत सोरेन ने अपना इस्तीफा भी दे दिया। उनके इस्तीफा के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ जो भी गठबंधन में थे, उन्होंने अपना विधायक दल का नेता चंपई सोरेन को चुन भी लिया।

24 घंटे बाद भी सरकार बनाने की अनुमति नहीं

झारखंड में कुल 81 विधानसभा सीटें हैं। जिसमें बहुमत के लिए 41 विधायक चाहिए। उसके बजाय इंडिया गठबंधन की तरफ 49 का बहुमत है। विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद चंपई सोरेन ने राज्यपाल को सरकार बनाने के लिए दावा भी ठोका कि सरकार बनाने की अनुमति दी जाए। फिर भी वहां का भाजपाई राज्यपाल अपने पद की गरिमा को ताख पर रखते हुए चुप्पी साधे हुए है। 24 घंटे के बाद भी राज्यपाल का कहना है कि हम कानूनी सलाह ले रहे हैं। राज्यपाल कानूनी सलाह ले नहीं रहे हैं, बल्कि वह भी उस खेल का हिस्सा बना हुए हैं। वह भाजपा के आलाकमान के इशारे पर काम कर रहे हैं। जिस तरह का खेल भाजपा खेल रही है। उसके अनुसार अल्पमत में होते हुए भी तिकड़म के साथ सरकार बनना चाहती है। इस दौरान या तो इधर के विधायकों को तरह तरह का प्रलोभन देकर, खरीद फरोख्त कर तोड़ने के प्रयास में लगी होगी। उसमें कामयाबी मिल जाएगी, तो खुद सरकार बनवा लेगी और अगर तिकड़म में असफल हो जाएगी, तो राष्ट्रपति शासन लागू करवा देगी।भाजपा सरकार इसी तरह का खेल विपक्ष के अन्य मुख्यमंत्रियों व विपक्ष के अन्य मजबूत नेताओं के साथ भी खेल सकती है। जो देखने के लिए मिल सकता है।

तिकड़मबाज सरकार से आम जनता का कितना भला

सोचने वाली बात है कि कुछ ही दिन पहले भाजपा ने बिहार में जो खेल खेला वह किसी से छिपा हुआ नहीं है।जिस खेल के तहत् महा गठबंधन के साथ सरकार चला रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भय दिखाकर या प्रलोभन देकर महागठबंधन से अलग कर भाजपा ने स्वयं सरकार बना लिया। बिहार में भी भाजपाई राज्यपाल है। जैसे ही नीतीश कुमार महागठबंधन से अलग होते हैं, मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हैं और कुछ ही घंटे के अंदर नयी सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं। राज्यपाल अनुमति देते हैं और मुख्यमंत्री का शपथ भी ले लेते हैं। भाजपा नीतीश कुमार के साथ सरकार भी बना लेती है। वहीं, झारखंड में मुख्यमंत्री द्वारा इस्तीफा दे दिया जाता है। मुख्यमंत्री को गिरफ्तार भी कर लिया जाता है। वहां कोई कार्यकारी मुख्यमंत्री भी नहीं रहता है। इसके बाद भी वहां का राज्यपाल यह कह रहे हो कि हम अभी कानूनी सलाह लेने में लगे हुए हैं। क्या कमाल है ! यह कमाल नहीं, यह भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक खेल है। ऐसे ही खेल खेलकर भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में विपक्ष को कमजोर करना चाहती है। विपक्ष को नहस-तहस करना चाहती है और सभी राज्यों में धीरे-धीरे अपना आधिपत्य स्थापित करना चाहती है। ऐसी तिकड़मबाज सरकार से आम जनता का कितना भला हो सकता है, इसका अंदाजा स्वतः लगाया जा सकता है।ऐसी स्थिति में यहां का लोकतंत्र कैसे बचेगा, यह काफी चिंतनीय है ।क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार इसी तरह का तिकड़म रचकर यहां के लोकतंत्र को ही पूरी तरह से खत्म करने पर आमादा है।
आपकी ही जाति का नेता आपके काम नहीं आएगा भाजपा की इस राजनीतिक खेल को समझना होगा और उसके लिए खुद आम जनता को आगे आना होगा। क्योंकि प्रजातंत्र में सारी शक्ति जनता के हाथों में होती है। आम जनता को अपनी जाति के उन नेताओं के बहकावे में नहीं आना होगा, जो सिर्फ सत्ता सुख भोगने के लिए भाजपा के साथ हैं या फिर एनडीए गठबंधन के साथ हैं। क्योंकि देखने में भले ही ऐसा लग रहा है कि वह नेता हमारी जाति का है, परंतु सच यह है कि वे ही नेता आपके बहुत बड़े दुश्मन हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि भाजपा सरकार में शाही अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हुआ हो, आदिवासियों या दलितों पिछड़ों पर। चाहे जिसके अहित में संसद में बिल आया हो। आपकी ही जाति के उस नेता का वहां मुंह नहीं खुल पाता है। आपके अधिकारों की बात नहीं कर पाता है।आपकी ही जाति का नेता आपके काम नहीं आएगा। जो नेता उस सरकार में रहकर भी आपके हक के लिए आवाज बुलंद नहीं कर सकता, वह किस काम का? उसे तो सरकार के राग में राग मिलाने की विवशता रहेगी।

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