Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी मांगों पर अड़े अन्नदाता, सिंघु बॉर्डर पर खालसा फौज ने संभाला मोर्चा…

Peasant movement : कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी मांगों पर अड़े अन्नदाता, सिंघु बॉर्डर पर खालसा फौज ने संभाला मोर्चा…

NEWSTODAYJ : नई दिल्ली। केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ किसान11वें दिन भी जमे हुए हैं। केंद्र सरकार और किसानों के बीच 5वें दौर की बातचीत विज्ञान भवन में हुई। बैठक में 40 किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे। हालांकि सरकार से साथ किसानों की पांचवें दौर की बातचीत भी बेनतीजा रही। अपनी मांगों पर डंटे किसानों ने 8 दिसंबर को ‘भारत बंद’ की घोषणा की है और चेतावनी दी है.

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कि यदि सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती तो आंदोलन तेज किया जाएगा तथा राष्ट्रीय राजधानी आने वाले और मार्गों को अवरुद्ध कर दिया जाएगा। इसी बीच शुक्रवार देर रात सिंघु बॉर्डर पर निहंग सिख या “खालसा फौज” ने किसानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि वे लड़ाई करने नहीं बल्कि शांति सुनिश्चित करने आए थे।पुलिस बैरिकेड्स के ठीक बगल में सोनीपत-दिल्ली राजमार्ग के एक किनारे पर, किसानों के चारों ओर एक चक्र बनाए नीले कपड़ों और बड़ी पगड़ी पहने खालसा फौज के लोग तलवारों से लैस हैं। उन्होंने कहा, ‘हमने अब उन बैरिकेड्स पर अपना डेरा जमा लिया है, जहां पुलिस बल तैनात है। यदि उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों तक पहुंचना है, तो उन्हें हमारे माध्यम से जाना होगा। समूह के एक सदस्य गुरदीप सिंह ने कहा कि निहंगों का अर्थ है सुरक्षा और संरक्षा। हम अपने लोगों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यहां हैं और हमें इससे कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते है। हम किसी भी तरह से हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं।’50-60 घोड़ों के साथ कैंपिंग के लिए ये लोग कुडुका, रोपड़ और पंजाब के अन्य क्षेत्रों से ट्रकों में सिंघू सीमा तक लाए गए। निहंग सिखों ने कहा कि उनकी उपस्थिति सुरक्षा और सुरक्षा का प्रतीक है। बता दें कि अभी तक हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन किसान मौतें दर्ज की गई हैं।

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किसानों ने केंद्र से कहा है कि यह अमानवीय है। विरोध प्रदर्शन के दौरान मारे गए 2 किसानों के लिए गुरुवार को पंजाब सरकार ने उनके परिवारों को 5 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है।ऐसे में कृषि मंत्री ने किसानों को आश्वासन देते हुए कहा कि एमएसपी जारी रहेगी, इसपर किसी भी प्रकार की शंका करना गलत है। लेकिन फिर भी अगर किसी प्रकार की कोई बात मन में है तो केंद्र सरकार उसका समाधान करने के लिए तैयार है।उधर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार के रवैये को देखते हुए 8 तारिख को भारत बंद का ऐलान किया है। इसपर कृषि मंत्री ने कहा, “मैं इसपर किसी प्रकार की कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं, भारत सरकार कई दौर की चर्चा कर चुकी है आए आगे भी करने के लिए तैयार है। आज बातचीत पूरी नहीं हो पाई इसलिए 9 तारीख को फिर से मीटिंग बुलवाई गई है।

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