Launch of dev diwali 2020 : प्रधानमंत्री मोदी ने पहला दीप जलाकर किया देव दीपावली का शुभारंभ…

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Launch of dev diwali 2020 : प्रधानमंत्री मोदी ने पहला दीप जलाकर किया देव दीपावली का शुभारंभ…

NEWSTODAYJ : वाराणसी। पीएम ने पहला दीप जलाकर देव दीपावली के उत्सव का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कार्तिक माह में काशी में गंगा नहान की चर्चा ठेठ बनारसी अंदाज में की। कहा कि, काशी जीवंत है, काशी की गलियां ऊर्जावान है। आज काशी गंगा तट पर प्रकाश गंगा का उत्‍सव मना रही है। काशी मां अन्‍नपूर्णा के आगमन की खुशी में मना रही है।

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देव दीपावली की साक्षी स्‍वंय महादेव बने हुए है। काशी की महिमा ही ऐसी है। काशी तो आत्‍म ज्ञान से प्रकाशित होती है। काशी पूरे विश्‍व को प्रकाश देने वाली है। हर युग में काशी ने विश्‍व का मार्ग दर्शन किया है। काशी के लोग भी देव स्‍वरूप है और काशी के 84 घाटों को देवता ही प्रज्‍ज्‍वलित कर रहे हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि काशीसे गुरुनानक देव ने लोगों को मार्ग दिखाया। सुधार की प्रक्रिया शुरू की और हर बदलाव का विरोध होता रहा है। चाहे वह किसानों के लिए बना नया कृषि कानून हो या काशी में विश्‍वनाथ कारिडोर ही क्‍यों न हो कई लोगों ने विरोध किया। लोगों ने चाह लिया तो श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू हो गई। बनारस में विकास की गति भी तेज गति से हो रहा है।

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प्राचीन बनारस का बदलता आधुनिक रूप दिखाई देेने लगा है। कोरोना संक्रमण काल में काशी के लोगों ने जो सेवा किया उसके लिए मैं आपके सेवा भाव को प्रणाम करता हूं।देवी अन्नपूर्णा की सौ साल पहले चोरी हुई प्रतिमा भारत को मिली। आखिर 107-108 वर्षों तक किसी सरकार की नजर उस ओर न पड़ी। हम क्यों इतने वर्षों तक मौन रहे। पीएम ने योग को वैश्विक मंच दिया। कुंभ को गंदगी व अव्यस्था का मंच बना दिया था। पीएम ने इस सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक रूप दिया।मां गंगा का अविरलता निर्मलता किसी से छिपी नहीं है। कभी इसमें डुबकी लगाने पर शरीर पर लाल चकत्ते निकल आते थे। आज गंगा स्नान ही नहीं आचमन के लायक भी हो गयी है।

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यह नमामि गंगे के सफल क्रियान्वयन से मूर्त रूप ले सका। मां गंगा का संबंध भगवान विश्वनाथ के साथ किस तरह है, गंगा काशी में आाईं तो भैरव ने रोकने के प्रयास किया। गंगा ने बाबा का चरण पखारने का आग्रह किया। विघ्न-बाधा न डालने का भरोसा दिलाने पर उन्हें यह मौका मिला। पीएम मोदी के कारण काशी विश्वनाथ धाम पर वह रूप एक बार फिर मूर्त रूप ले सका है। काशी आज जिस रूप में हम सबके सामने है, हमारे आपके लिए गौरव है।

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