NEWSTODAYJ_HEALTH & FITNESS:दोपहर में नींद की झपकी के बारे में सुनते ही ‘थ्री इडियट्स’ फ़िल्म के प्रोफेसर सहस्त्रबुद्धे जरूर याद आए होंगे। रोज दोपहर में वो ठीक 7.5 मिनिट्स की झपकी लिया करते थे। हालांकि यह पात्र कुछ मनोरंजन और कुछ सार्थक सन्देश देने वाला था लेकिन असल जिंदगी में भी ऐसा करने वाले कई लोग होते हैं। आपने अक्सर लोगों से सुना होगा कि दिन की झपकी लिए बिना उन्हें आराम नहीं मिलता। इस कैटेगरी में अधिकांशतः घर पर रहने वाली महिलाएं, पुरुष और बच्चे या बुजुर्ग आते हैं। इस झपकी की अवधि हर व्यक्ति के हिसाब से अलग हो सकती है लेकिन अमूमन झपकी को आधा घण्टे से 2 घण्टे का मान लिया जाता है। कई लोगों को तो इससे इतनी रिलीफ और एनर्जी मिलती है कि वे किसी दिन अगर इस झपकी को मिस कर दें तो बीमार महसूस करने लगते हैं। कुछ लोगों के लिए यह सुबह जल्दी उठने पर होने वाली नींद की पूर्ति होती है। तो क्या वाकई ये ‘जादू की झप्पी’, इतनी असरदार होती है

 

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नींद का संतुलन शरीर ही नहीं पूरे दिमाग के लिए जरूरी होता है। हर व्यक्ति के लिए नींद की जरूरत अलग-अलग हो सकती है, पर आमतौर पर 7-8 घण्टे की नींद को अच्छा माना जाता है। लेकिन कई बार नौकरी, परिवार या अन्य जिम्मेदारियों के चलते लोगों को सुबह बहुत जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में दोपहर की एक झपकी उनके लिए जरूरी हो जाती है। काम के बढ़ते समय, भागदौड़ भरी जिंदगी और स्ट्रेस से भरपूर माहौल में दिन की झपकी कई बार तरोताजा करने का काम करती है।

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