Dhanbad News : बचाव कार्य मे शिथिल पड़ा ईसीएल प्रबन्धन , चौथे दिन बचाव कार्य जारी , पानी का स्तर ज्यादा…

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Dhanbad News : बचाव कार्य मे शिथिल पड़ा ईसीएल प्रबन्धन , चौथे दिन बचाव कार्य जारी , पानी का स्तर ज्यादा…

NEWSTODAYJ : धनबाद जिले के निरसा ईसीएल मुगमा एरिया कोलयरी के उक्त खदान में खदान के अंदर फंसे दो कोल कर्मियों को बचाने को लेकर बचाव कार्य लगातार चौथे दिन भी शुरू किया गया। हालांकि बीती देर रात उड़ीसा के कटक से आए पांच सदस्य गोताखोर दूसरी बार उक्त पानी में डूबे खदान में प्रवेश कर कोल कर्मियों को बचाने का प्रयास किया पर सुबह के 3:00 बजे तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिली और वह वापस खदान से बाहर लौट गए।

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शुक्रवार की सुबह उक्त खदान के मुहाने पर स्थिति बहुत सामान्य दिखी। बचाव कार्य के नाम पर खदान में सिर्फ फिलहाल चार मोटर पंप पानी निकालने का काम कर रहे हैं। प्रबंधन के आला अधिकारियों का कहना है कि जब तक पानी का स्तर कम नहीं होगा तब तक कुछ भी विशेष बचाव कार्य करने में हम असफल है। बीती देर रात दूसरी बार खदान से बाहर निकलने के बाद गोताखोरों ने प्रबंधन को बताया कि जब तक पानी का स्तर कुछ कम नहीं होगा वह भी कुछ करने में असमर्थ है। शुक्रवार की सुबह विगत 4 दिनों से खदान के मुहाने पर डटे मानिक बाउरी के परिजन उनके परिवार के लोगों का सब्र प्रबंधन के कार्यशैली से टूट गया। विगत लगातार चार दिनों से अंदर फंसे कोल कर्मी मानिक बाउरी का पूरा परिवार उनकी पत्नी उनके बच्चे खदान के मुहाने पर अपनी नजरें टिका कर इस आशा में बैठे थे कि शायद अंदर गए गोताखोर या बचाव कार्य में लगे लोग उनके पिता को बाहर निकाल लेंगे पर ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा है।

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परिजनों ने सीधा सीधा आरोप प्रबंधन की लापरवाही पर लगाया है अंदर फंसे कोल कर्मी मानिक बाउरी के पुत्र ने कहा कि हम यहां विगत 4 दिनों से पड़े हैं और प्रबंधन की तरफ से घटना से अस्वस्थ हुई। मेरी मां के लिए स्वास्थ्य संबंधी कोई सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। मेरी मां का तबीयत दिन-ब-दिन बिगड़ता जा रहा है।

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पर इसकी सुध लेने वाला भी यहां कोई नहीं है। थक हार कर शुक्रवार की सुबह उनके परिजन यहां से बड़ी मायूसी के साथ चलते बने। उनके पुत्र ने कहा कि उनकी माता को तत्काल इलाज की आवश्यकता है। जिसके लिए भी अब बाहर जा रहे हैं जिस कोल कर्मी मानिक बाउरी ने प्रबंधन के लिए काम करते हुए अपनी जान जोखिम में डाल दी। उनके परिजनों को सुध लेने वाला भी आज कोई नहीं है।

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