बाबुलाल मरांडी के नेतृत्व मे झारखंड विकास मोर्चा सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा रहा है।

धनबाद।

बाबुलाल मरांडी के नेतृत्व मे झारखंड विकास मोर्चा सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा रहा है।

धनबाद। बाबुलाल मरांडी के नेतृत्व मे झारखंड विकास मोर्चा सशक्त विपक्ष की भूमिका निभा रहा है। सीमित संसाधन और विषम परिस्थितियों मे भी झाविमो झारखंड में मुद्दो की लड़ाई लड़ रहा है। मिशन 2019 विधानसभा चुनाव के लिए झाविमो ने व्यापक रणनीति बनाई है। दूसरी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों से अलग झाविमो जनता के बीच जाकर जनहित से जुड़े मुद्दे को उठा रहा है। जबसे झाविमो का गठन हुआ है झाविमो ने जनहित के मुद्दो को लेकर जितने आंदोलन और प्रदर्शन किये हैं, राज्य की दूसरी किसी पार्टी ने इस तरह मुखर होकर आवाज नहीं उठाई है। जहाँ दूसरी पार्टियों ने अपने पार्टी आफिस में बैठक कर, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार की नीतियों का विरोध किया। वहीं झाविमो ने अपने आंदोलन को राजव्यापी बना दिया है। राजनीतिक मैदान में जोरदार तरीके से लड़ा है। चाहे सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन के विरोध का मामला हो या फिर स्थानीय नीति, गोड्डा में जमीन अधिग्रहण का मामला, गोला-बड़कागांव और खूंटी गोलीकांड का मामला या फिर कोडरमा में ऐशपौंड निर्माण के विरोध का मामला। इन सभी मुद्दों के विरोध में चल रहे आंदोलनों में झाविमो ने मुखर होकर अपनी आवाज उठाई। झाविमो सुप्रीमो बाबुलाल मरांडी ने कभी किसी भी आंदोलन को पार्टी के पदाधिकारियों के भरोसे नहीं छोड़ा। आंदोलन में शामिल होने के लिए एसी कमरे से बाहर निकल कर राज्य के जंगल, पहाडों की खाक छानी। कई बार गिरफ्तारियां दी। इसके बावजूद कभी पीछे नहीं हटे। आज भी उसी जोश और जज्बे के साथ लोकतान्त्रिक आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। मैदान में उतर कर मुद्दों की लड़ाई लड़ रहे हैं। झाविमो को डुबता जहाज मानकर पार्टी के कई नेता संगठन छोड़ दिये। तब बाबुलाल मरांडी ने खुद मोरचा संभाला। दूसरे नेताओं की तरह सिर्फ ब्यानबाजी नहीं की बल्कि पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर पड़े। राज्य भर में होने वाली पार्टी की हर सभा, हर आंदोलन हर प्रदर्शन मे शामिल होने लगे। ज्वलंत मुद्दे पर खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस करने लगे। सीएनटी-एसपीटी एक्ट, स्थानीय नीति और राज्य भर मे हुये तीन तीन गोलीकांड के मुद्दे पर उन्होंने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सैकड़ों सभाओं और जुलूशों मे शामिल हुये। इन मुद्दों को लेकर राजभवन का भी घेराव किया। बाबुलाल मंराडी का राजनीतिक कद का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि जब से भाजपा से अलग होकर झाविमो की नींव रखी है, सभी राजनीतिक पार्टी के लोग उनका लोहा मानते हैं। सभी दलों के लोगों को पता है कि वे लंबी रेस के घोडे हैं और कभी हार नहीं मानते हैं। यह तो मानना ही होगा कि वे कुशल नेतृत्वकर्ता है। वरना जिस तरह एक साथ छह विधायक को जिस तरह भाजपा ने पैसा और पद का लालच देकर तोड़ा, कई पदाधिकारी पार्टी छोड़ कर चले गये। उस वक्त यही उम्मीद की जा रही थी कि अब पार्टी का शटर जल्द डाउन होने वाला है। लेकिन बाबुलाल मंराडी ने हार नहीं मानी जो लोग साथ थे, उन्हें ही लेकर आगे बढ़ते चले गये और आज पूरे झारखंड में संगठन पूरी तरह बना कर खडा किये हैं और विधानसभा चुनाव में पूरे झारखंड में मुख्यमंत्री पद के लिए जनता की पहली पसंद भी है।

NEWSTODAYJHARKHAND.COM

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here