झारखंड सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल, 3 घंटे बाद भी नहीं आयी 108 एम्बुलेंस चारपाई पर ईलाज के लिए ले जाना पड़ा

(बोकारो)

झारखंड सरकार के स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल, 3 घंटे बाद भी नहीं आयी 108 एम्बुलेंस चारपाई पर ईलाज के लिए ले जाना पड़ा।

गोमिया। सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर सरकार के नेता राज्य में विकास के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं कि सरकार आखिरी पंक्ति तक विकास और अपनी योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है। लेकिन गोमिया के सुदूरवर्ती गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं का कितना बुरा हाल है। इसकी एक तस्वीर रविवार को दिखने को मिली।

बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव सिमराबेड़ा में एक महिला मरीज को चारपाई पर ईलाज के लिए ले जाने का मामला प्रकाश में आया है। पहले चारपाई पर रस्सी बांधी गई और बांस की बल्ली के सहारे परिजनों सहित गांव वाले पीड़िता की ईलाज के लिए शहरी क्षेत्र की ओंर दौड़े। आरोप है कि महिला के रिश्तेदारों ने 108 एंबुलेंस सर्विस पर कॉल की थी जिसमें कॉल सेंटर ऑपरेटर ने बताया कि मोबाईल बंद नहीं रखें आधे घंटे में एम्बुलेंस गंतव्य लोकेशन पर उपलब्ध होगी। लेकिन तीन घंटे के बाद भी गाड़ी नहीं आई। महिला का पति खेती गृहस्थी का काम करता है। एंबुलेंस का इंतजार और पीड़िता की हालत और खराब होता देख तिसकोपी गांव के एक प्राईवेट वाहन को पैसे देकर अस्पताल पहुंचाने कहा जिससे महिला को फिर हजारीबाग सदर अस्पताल ले जाया गया।

क्या कहते हैं पीड़िता के रिश्तेदार और गांव वाले ये भी पढ़े।

सिमराबेड़ा में पीड़ित महिला के रिश्तेदारों और आस-पास के लोगों ने बताया कि शनिवार की देर रात छोटेलाल किस्कू की पत्नी छोटकी देवी (36) की तबियत अचानक ख़राब हो गयी। उसने अपने भाई नरेश किस्कू, महेश किस्कू, सुखदेव किस्कू, भतीजा सुरेश किस्कू, अनिल किस्कू पड़ोसी मनोज कुमार महतो, महेंद्र महतो, चमेली देवी को इस बारे में जानकारी दी और सुबह होने का इंतजार करने लगे। हालत और खराब होने पर कुछ रास्ता न दिखा तो हमलोगों ने अहले सुबह साढ़े तीन बजे छोटकी देवी को चारपाई पर ही झुमरा ले जाने का फैसला किया। चूंकि झुमरा से वाहनों का आवागमन संभव है। जब हम वहां पैदल 7 किलोमीटर की दूरी तय कर सुबह 9 बजे पहुंचे तो झारखंड सरकार के 108 एम्बुलेंस सर्विस को फोन किया। विभाग ने आधे घंटे तक इंतजार करने को कहा परंतु ढाई तीन घंटे से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी एम्बुलेंस नहीं आयी। पीड़िता की परिस्थिति भांपते हुए 12 बजे भाड़े की गाड़ी से उसे हजारीबाग सदर भेजा गया है।ग्रामीणों ने बांस की बल्ली, जुट की रस्सी, लकड़ी की चारपाई और पीड़िता को कंधे पर ढोने के कई कारण बताए। ग्रामीणों ने बताया कि ये सारा समस्या पथ निर्माण एवं वन विभाग में आपसी तालमेल और एनओसी नहीं मिलने की वजह से हो रहा है। परिणामस्वरूप सड़कों का योजना और प्रारूप तैयार है परंतु सड़कें नहीं बन पा रही है। अगर सड़क तैयार हो जाती तो आज पीड़ितों को चारपाई पर पैदल लेकर चलने की नौबत नहीं आती।वहीं एक कारण यह भी बताया गया कि झुमरा एक्शन प्लान के तहत झुमरा के निकटवर्ती सात पंचायतों का विकास किया जाना है। प्रशासन ने जिन सात पंचायतों का जिक्र किया है उसमें सिमराबेड़ा गांव भी शामिल है। परंतु एक्शन प्लान की घोषणा के वर्षों गुजर गए पर अब भी बुनियादी सुविधाओं (पेयजल व सड़क) से ग्रामीण वंचित हैं। ज्ञात हो कि रस्सी, चारपाई, कंधे और बल्ली की यह कहानी गोमिया के लिए कोई नई नहीं है इससे पूर्व भी झुमरा पहाड़ के अमन, बलथरवा, सुवरकटवा, सिमराबेड़ा की ऐसी कई घटनाएं देखने को मिली है परंतु प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करने के बजाय खानापूर्ति करने में लगी है। तस्वीरें अपने आप में ये बताने को काफी हैं कि आखिर बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड में विभाग स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कितनी संजीदा है।NEWSTODAYJHARKHAND.COM

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