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खरना के प्रसाद के बाद लोकआस्था का महापर्व छठ की सुरुआत जाने क्या है नहाय खाय का महत्व

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(धनबाद)

रिपोर्ट छोटे खान !

खरना के प्रसाद के बाद लोकआस्था का महापर्व छठ की सुरुआत जाने क्या है नहाय खाय का महत्व…….!

(धनबाद)-नहाए खाये के साथ लोक आस्था का महापर्व का शुभारंभ आज से हो गया है आज छठ व्रत धारी स्नान ध्यान कर विधिवत पूजा पाठ कर करने का प्रसाद बनाती हैं……!

और प्रसाद सभी के बीच बाटा जाता है ऐसा मानना है कि खरने के प्रसाद पहले सुबह भगवान भास्कर को मन में ध्यान लगा कर व्रती शाम के समय तलाव छठ घाटों में भगवान भास्कर का ध्यान लगाकर स्नान करती है और भगवान भास्कर को प्रथम अस्ताचल गामी का अर्ध दिया जाता है……!

उसके पश्चात व्रती छठ मां की आराधना में लीन हो जाते हैं और ठीक उसी के पश्चात अहले सुबह भगवान भास्कर के उड़ते हुए स्वरूप अर्ध प्रदान किया जाता है इसी के साथ लोक आस्था का महापर्व संपन्न होता है…….!

नहाय खाय का महत्व……!

कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाय खाय होता है। इस दिन व्रती नदी में या घर पर ही जल में गंगा जल डालकर स्नान करता है। व्रती स्नान करने के बाद नया वस्त्र धारण करता है। नया वस्त्र धारण करने के बाद भोजन ग्रहण करेगा। उसके भोजन करने के पश्चात घर के और सदस्य भोजन करेंगे।

खरना का महत्व……..!

ये दृश्य है सहयोगी नगर सबलपुर के एक छट व्रत धारी के घर का………..!कार्तिक शुक्ल पंचमी को यह व्रत रखा जाता है तथा शाम को व्रती भोजन ग्रहण करते हैं। यह खरना कहा जाता है। इस दिन बिना अन्न और जल के रहा जाता है। नमक और चीनी का प्रयोग वर्जित है। गुड़ की बनी बखीर वितरित की जाती है……….!



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