क्लिक कर जानें 15 मई को ही क्यों मनाया जाता है विश्व परिवार दिवस।

नई दिल्ली।

क्लिक कर जानें 15 मई को ही क्यों मनाया जाता है विश्व परिवार दिवस।

( 15 मई विश्व परिवार दिवस पर विशेष)

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र संघ की जनरल एसेम्बली ने दिनांक 20 सितम्बर 1993 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है जिसमें सभी सदस्य देशों में प्रतिवर्ष 15 मई को ‘अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस’ के रूप में मनाने की बात स्वीकार की गयी है। Image result for विश्व परिवार दिवस।संयुक्त राष्ट्र संघ का यह प्रयास सारे विश्व के परिवारों में पारिवारिक एकता तथा परिवार से संबंधित मूल्यों के महत्व की ओर ध्यान आकर्षित करता है। साथ ही परिवार की समस्याओं के समाधान के लिए उचित कदम उठाने के लिए प्रेरित करता है। यह दिवस सभी देशों के परिवारों की सहायता करने का एक सुअवसर है। हमारा मानना है कि पारिवारिक एकता से ही वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा साकार होगी।
एक आधुनिक स्कूल को अपने युग की समस्याओं तथा निम्न परिवारों से जुड़ा होना चाहिए :-

1. स्वयं के परिवार,
2. अपने स्कूल के अभिभावकों तथा टीचर्स के परिवार
3. राष्ट्र के परिवार तथा
4. विश्व परिवार से जुड़ा होना चाहिए। वसुधा किसी पराये का नहीं वरन् स्वयं हमारा अपना कुटुम्ब है। हमारा मानना है कि परिवार एक ईट के समान है। एक-एक ईट को जोड़कर विश्व रूपी भवन का निर्माण होता है। परिवार रूपी ईट मजबूत तथा टिकाऊ होने से विश्व भी मजबूत, एकताबद्ध, न्यायप्रिय तथा समृद्ध बनेगा। इसलिए यह कहा जाता है कि पारिवारिक एकता विश्व एकता की आधारशिला है।
परिवार आध्यात्मिक बनें :- पारिवारिक सम्बन्ध बहुत गहरे होते हैं। हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि आध्यात्मिक सम्बन्ध उनसे कहीं अधिक गहरे हैं, वे चिरस्थायी होते हैं और मृत्यु के पश्चात् भी रहते हैं, जबकि भौतिक सम्बन्ध, जब तक उन्हें आध्यात्मिक बन्धनों का आश्रय नहीं मिलता, केवल इसी जीवन तक सीमित रहते हैं। संसार में वे सबसे अधिक समृद्धशाली बनते हैं। ऐसे परिवारों के आपसी सम्बन्ध व्यवस्थित होते हैं, वे सुख-शान्ति का उपभोग करते हैं, वे निर्विघ्न और उनकी स्थितियाँ सुनिश्चित होती है। वे सभी की प्रेरणा के स्त्रोत बन जाते हैं। ऐसा परिवार दिन-प्रतिदिन अपने कद और अपने अटूट सम्मान में वृद्धि ही करता जाता है।
(5) विवाह कभी भी दो व्यक्तियों के बीच नहीं होता है वरन् तीन के बीच अर्थात वर-वधु तथा परमात्मा के बीच होता है :- सभी धर्मो में सभी विवाह में परमात्मा को साक्षी मानकर वर-वधु विवाह की सारी प्रतिज्ञाऐं करते हैं कि वे अपने वैवाहिक जीवन में सभी निर्णय और कार्य आपसी परामर्श से इस प्रकार करेंगे कि उनका कोई भी कार्य ईश्वर को नाराज करने वाला न हो वरन् ईश्वर को प्रसन्न करने वाला हो। पति-पत्नी दोनों को ही एक-दूसरे के आध्यात्मिक विकास में सहायक बनना चाहिए ताकि उनसे उत्पन्न उनकी संतान भी आध्यात्मिक बन सके।Image result for विश्व परिवार दिवस।
पति-पत्नी को प्रतिदिन मिलकर प्रार्थना करनी चाहिये और प्रतिदिन नीचे लिखी प्रतिज्ञायें पवित्र मन से दोहरानी चाहिए :-
1.आज से हम एक-दूसरे के साथ अपने व्यक्तित्व को मिलाकर नये जीवन की सृष्टि करते हैं।
2.पूरे जीवन भर एक-दूसरे के मित्र बनकर रहेंगे और बड़ी से बड़ी कठिनाईयां एवं विपत्तियों में एक-दूसरे को पूरा-पूरा विश्वास, स्नेह तथा सहयोग देते रहेंगे।
3.जीवन की गतिविधियों के निर्धारण में एक-दूसरे के परामर्श को महत्व देंगे।
4.एक-दूसरे की सुख-शांति तथा प्रगति-सुरक्षा की व्यवस्था करने में अपनी शक्ति, प्रतिभा, योग्यता, साधनों आदि को पूरे मनोयोग एवं ईमानदारी से लगाते रहेंगे।
5. दोनों अपनी ओर से श्रेष्ठ व्यवहार बनाए रखने का पूरा-पूरा प्रयत्न करेंगे। मतभेदों और भूलों का सुधार शांति के साथ करेंगे। किसी के सामने एक-दूसरे को लांछित एवं तिरस्कृत नहीं करेंगे।
6. दोनों में से किसी के असमर्थ या विमुख हो जाने पर भी अपने सहयोग और कर्त्तव्यपालन में रत्ती भर भी कमी नहीं आने देगे।
7. कर्त्तव्यपालन एवं लोकहित जैसे कार्यो में एक-दूसरे के बाधक नहीं, सहायक बनेंगे।
8. एक-दूसरे के प्रति पतिव्रत तथा पत्नीव्रत धर्म का पालन करेंगे। इसी मर्यादा के अनुरूप अपने विचार, दृष्टि एवं आचरण को विकसित करेंगे।
9. हम पति-पत्नी मिलकर प्रतिज्ञा करते हैंं कि हम सद्गृहस्थ के ईश्वरीय आदर्शो के आधार पर घर में सुख, सहयोग, एकता एवं शान्ति से भरा आध्यात्मिकता का वातावरण बनायेंगे और इसी का शिक्षण हम अपने प्रिय बच्चों को देंगे।

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