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Tusu festival 2021 :अगहन संक्रांति : टुसू पर्व की शुरुआत…

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Tusu festival 2021 :अगहन संक्रांति : टुसू पर्व की शुरुआत…

NEWSTODAYJ : धनबाद । मानव सभ्यता के विकास में सबसे महत्वपूर्ण खोज कृषि है और खेती में भी धान की खेती सबसे प्रमुख है। धान की कृषि से जुड़ा हुआ परब टुसू पर्व का विशेष स्थान है।झारखंड, बंगाल, उड़ीसा आदि क्षेत्र में अगहन संक्रांति का विशेष महत्व है। इस दिन कृषक समुदाय “डिनी माञ” को घर में लेकर आते हैं। साथ ही धान की फसल घर आने की खुशी में महिलायें और लड़कियों द्वारा टुसु का स्थापना किया जाता है; जो पूरे माह गीत संगीत के द्वारा टुसू को जगाया भी जाता है।जब खेत में धान पक कर तैयार हो जाती है और उसे घर में लाया जाता है तो किसान कुछ धान की बाली को खेत मे छोड़ देता है जिसे डिनी माञ कहा जाता है। धान की यह बाली खेत के “डिनी कुड़” (ईशान कोण) में छोड़ा जाता है। जिसे अगहन संक्रांति के दिन विधि पूर्वक सिंदूर, काजल, अरवा चावल, दूध, पानी, दूबघास से सेवरन पूजन करके घर के मुखिया द्वारा माथे पर रखकर बिना कुछ बोले घर में लाकर स्थापित करता है।

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इस दिन डिनी माञ आने की खुशी में घर आंगन को लीपा-पोता जाता है और घर में पीठा पकवान बनाया जाता है।भारत एक कृषि प्रधान देश है और कृषक आदिवासी, कुड़मियों के बीच “बारह मासे, तेरह परब” अर्थात इस महीने टुसू का स्थापना किया जाता है। आज ही के दिन कृषक समाज की लड़कियां टुसू को स्थापित करती है। जिसमें एक सारवा में फूल,धान,अरवा चावल गोबर लाडू, चावल लाडू, दूबघास आदि के द्वारा सेवरन किया जाता है। जो पूरे महीने महिलायें समुह में बैठकर प्राकृतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, सृष्टि के कथाओं को गीतों के माध्यम से गाया जाता है। यह अनवरत रूप से चलता है तथा पौस संक्रांति को समाप्त होती है और टुसू का विसर्जन किया जाता है। इस तरह टुसू न तो कोई राजा की बेटी थी और न किसी जमींदार की बेटी थी। बल्कि टुसू पूर्णत: प्राकृतिक और धान की फसल घर आने की खुशी का त्यौहार है।

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