Ram bhakt celebration : अयोध्या श्री राम जन्मभूमि शिलान्यास के अवसर पर दीप प्रज्वलित कर PM मोदी को दिया धन्यवाद , पूरे कोयलांचल दीपावली में तब्दील…

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Ram bhakt celebration : अयोध्या श्री राम जन्मभूमि शिलान्यास के अवसर पर दीप प्रज्वलित कर PM मोदी को दिया धन्यवाद , पूरे कोयलांचल दीपावली में तब्दील…

  • अयोध्या से 6 मील दूर पर सनीथू नामक गांव के पंडित देवीदीन पांडे ने सूर्यवंशी क्षत्रिय को धर्म की रक्षार्थ के लिए तैयार किया और 90000 सेना के साथ लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हो गए थे।
  • 50000 सेना भेजा किंतु इस बार भी चिमटा धारी साधु सेनाओं के साथ गुरु गोविंद सिंह के सेना ने मिलकर मार भगाया यह घटना 1680 का था।

NEWSTODYJ : धनबाद।झरिया : श्री राम मंदिर का इतिहास 492 वर्ष पुराना रहा अयोध्या में स्थित श्री राम जन्मभूमि पर मुगलों द्वारा लाखों हिंदुओं का कत्लेआम किया गया था और सनातन धर्मियो ने जान की परवाह किए बिना धर्म रक्षार्थ के लिए लहू के आखिरी बूंद तक लड़ा और वीरगति को प्राप्त हुए इस मंदिर के रक्षार्थ हेतु इतिहासकार कनिंघम अपने लखनऊ गजेटियर के 66वें अंक में पृष्ठ 3 पर लिखा है.

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कि 174000 हिंदुओं की लाशें गिर जाने के पश्चात मीर बांकी मंदिर ध्वस्त करने में सफल हुआ और उसके बाद मंदिर के चारों तरफ तोप लगवा कर मंदिर को ध्वस्त कर दिया वही हैमिल्टन नामक अंग्रेज बारंबाकी गजेटियर में लिखता है कि जलाल शाह ने हिंदुओं के खून का गारा बनाकर लखोरी ईटों की नींव मस्जिद बनवाने में उपयोग की थी। वही अयोध्या से 6 मील दूर पर सनीथू नामक गांव के पंडित देवीदीन पांडे ने सूर्यवंशी क्षत्रिय को धर्म की रक्षार्थ के लिए तैयार किया और 90000 सेना के साथ लड़ते हुए।

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वीरगति को प्राप्त हो गए थे। यहीं बात खत्म नहीं होती 3000 नारी सेनाओं ने भी लड़ते हुए अपनी जान निछावर कर दी थी। 1640 ई• में औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त करने के लिए जांबाज खान के नेतृत्व में एक सेना भेजी थी उस समय बाबा वैष्णो दास के साथ साधु की एक सेना थी जो हर विद्या में निपुण थे इन साधुओं को चिमटा धारीसेना भी कहते थे। जब राम जन्मभूमि पर जबाज खाँ आक्रमण किया तो हिंदुओं के साथ चिमटा धारी साधुओं की सेना मिलकर उर्वशी कुंड नामक जगह पर 7 दिनों तक भीषण युद्ध किया और जबाज खाँ के सेना को मार भगाया।

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पराजित सेना देख औरंगजेब क्रोधित हो उठा और फिर 50000 सेना भेजा किंतु इस बार भी चिमटा धारी साधु सेनाओं के साथ गुरु गोविंद सिंह के सेना ने मिलकर मार भगाया यह घटना 1680 का था। फिर 4 वर्ष औरंगजेब अयोध्या में हमला करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया इस तरफ कई बार राम जन्मभूमि हिंदुओं ने हासिल किया और फिर मुगलों द्वारा हिंदुओं का कत्लेआम कर मंदिर का इतिहास बदलने का प्रयास किया गया। 1528 से 1949 ई• तक के कालखंड में श्री राम जन्म भूमि स्थल पर मंदिर निर्माण हेतु 76 बार संघर्ष युद्ध हुए।

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आखिरकार 23 दिसंबर 1949 को हिंदुओं ने रामलला की मूर्ति स्थापित कर पूजन कीर्तन शुरू कर दिया। तत्कालीन मजिस्ट्रेट ने ढांचे को आपराधिक दंड संहिता की धारा 145 के तहत मंदिर के गेट पर ताला जड़ दिया फिर न्यायालय के आदेश पर 1 फरवरी 1986 को ताला खोला गया 9 नवंबर 1989 को शिलान्यास कर दिया गया किंतु ढांचा के वजह से मुसलमानों को मोह था। इस वजह से विवाद हो गया और विवाद न्यायालय तक पहुंच गया किंतु न्यायालय में भी विवाद ना सुलझता देख हजारों की संख्या में राम भक्तों ने 30 अक्टूबर 1990 को सारी बाधाओं को लंक उस ढांचे को गिरा दिया जिसमें राम भक्तों पर गोली भी चली और बहुत सारे राम भक्त अपने जीवन की आहुति दे दी।

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इस विवाद को सुलझाने का प्रयास पिछले 30 वर्षों में 8 बार किया गया और अंततः 9 नवंबर 2019 को न्यायालय द्वारा राम मंदिर निर्माण का आदेश दिया गया आज 5 अगस्त 2020 स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया। श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर शिलान्यास सर्वसम्मति से संपन्न हुआ इस स्वर्णिम अवसर पर जिला अंतर्गत झरिया थाना क्षेत्र के लाल बाजार में दीप प्रज्वलित कर रामलला का स्वागत किया गया।पूरे क्षेत्र में दीपावली सा माहौल हो गया। मिडिया से बात करते हुए सुरदर्शन पिलानियां उर्फ टाइगर ने बताया सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं इसलिए क्योंकि वर्षो पुरानी राम मंदिर हमारे देश मे बान रहा है।

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हमारे प्रधानमंत्री ने बड़े-बड़े मसले चुटकी में हल कर दिए। हम सभी लोग मिल कर आज श्री राम जन्म भूमि पूजन के उपलक्ष्य में लाल बाजार झरिया में पूजा अर्चना का कार्यक्रम किया।एक दूसरे को मिठाईयां खिलाए पटाखे छोड़े और खूब खुशियां मनाए।अंत में उन्होंने जय श्री राम नारा लगाया। मौके पर मुख्य रुप से उपस्थित हुए भगवा रक्षा वाहिनी सुरदर्शन पिलानिया , अन्य जाने माने स्थानीय लोगों।

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