Jharkhand News : झारखंड में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के आदेश, जानें कैसे गरीब छात्रों के हक पर डाला गया डाका…

Jharkhand News : झारखंड में छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के आदेश, जानें कैसे गरीब छात्रों के हक पर डाला गया डाका…

NEWSTODAYJ : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्ववर्ती BJP सरकार के दौरान कल्याण विभाग में करोडों रुपये के कथित छात्रवृत्ति घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच कराने की घोषणा की है। दुमका विधानसभा क्षेत्र से BJP की प्रत्याशी और पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार में कल्याण मंत्री रहीं लुईस मरांडी ने सोमवार को कहा कि उनके कार्यकाल में छात्रों को छात्रवृत्ति देने में कोई भी गड़बड़ी नहीं हुई।

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और मुख्यमंत्री सोरेन किसी भी प्रकार की जांच करा सकते हैं। मुख्यमंत्री के बाद केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी झारखंड में प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति वितरण में हुई अनियमितता मामले में मंगलवार को जांच का आदेश दिया।बता दें कि झारखंड के कल्याण विभाग में प्री मैट्रिक के अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाने वाली करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा का मामला सामने आया है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यहां डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए लाभार्थियों के नाम के पैसे दूसरों के खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

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छात्रों के लिए वर्ष 2019-20 में केंद्र ने झारखंड को 61 करोड़ रुपये दिए थे, इनमें से करीब 23 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। रामगढ़ के दुलमी स्थित फैजुल रज्जा मदरसा में सबसे पहले इसका खुलासा हुआ, जहां उम्रदराज महिला एवं पुरुषों को 7वीं-8वीं का छात्र बताकर छात्रवृत्ति दी गई।इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी इंवेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग के दूसरे हिस्से में इससे जुड़ी कई ऐसी जानकारियां दी हैं, जो हैरान करती हैं। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कैसे इतनी बड़ी रकम का फर्जीवाड़ा किया गया। अखबार ने पिछले महीने राज्य के छह जिलों में 15 स्कूलों को ट्रैक किया। 30 से अधिक छात्रों, अभिभावकों और स्कूल अधिकारियों से लाभार्थियों की सूची की जांच करने के उद्देश्य से बात भी की गई।

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रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़ा करनेवाला गिरोह सक्रिय है, जो पहले अल्पसंख्यक समुदाय के जरूरतमंद लोगों की तलाश करता है।रिपोर्ट के मुताबिक ये गिरोह ऐसे लोगों को सऊदी अरब से मदद दिलाने के नाम पर उसके आधार कार्ड व बैंक खाते की जानकारी लेता है। फिर फर्जी तरीके से राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल में स्कूल की मिलीभगत से छात्रवृत्ति के लिए आवेदन जमा करता है। बैंक में छात्रवृत्ति की राशि आने पर कुछ राशि उसे देकर बाकी रख लेता है। इसका खुलासा भारत सरकार को मिली शिकायत की हुई शुरूआती जांच में हुआ है। मुख्यमंत्री ने अखबार में छपी खबर का हवाला देते हुए कहा था कि डीबीटी के माध्यम से राशि ट्रांसफर करने के दौरान बच्चों की छात्रवृत्ति से वंचित किया गया।

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इस मामले में राज्य सरकार जांच कराएगी।अखबार की खबर के अनुसार अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्रालय से झारखंड में मैट्रिक पूर्व के छात्रों को भेजी गई छात्रवृत्ति में कथित घोटाला हुआ और छात्रवृत्ति छात्रों को या तो मिली ही नहीं अथवा मिली तो उसका सिर्फ कुछ हिस्सा ही उन्हें प्राप्त हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, स्‍कूलों में छात्रों की संख्‍या अधिक बताकर उनके नाम पर छात्रवृत्ति की राशि की निकासी की जाती रही। उम्रदराज लोगों या जिन लोगों ने स्‍कूल का चेहरा भी नहीं देखा से बैंक खाता, आधार की जानकारी और अंगूठे का निशान लेकर उन्‍हें छात्र बना छात्रवृत्ति घोटाला किया जाता रहा। कुछ से सिर्फ आधार की कॉपी और अंगूठे का निशान लेकर फर्जीवाड़ा होता था और संबंधित व्‍यक्ति को जानकारी तक नहीं रहती थी।

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