Jharkhand News : आलू की बढ़ी कीमतों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी , 40 से 50 रुपए तक आलू के बीज बाजार में बेचे जा रहे…

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Jharkhand News : आलू की बढ़ी कीमतों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी , 40 से 50 रुपए तक आलू के बीज बाजार में बेचे जा रहे…

NEWSTODAYJ रांची : आलू की बढ़ी कीमतों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है।आलू के महंगे बीज और सरकार के द्वारा समय पर बीज उपलब्ध नहीं करवाने की वजह से आधे से भी कम किसान इस बार आलू की खेती कर रहे हैं।अधिक लागत और मौसम की मार के बाद फसल की बर्बादी से भी किसान डरे हुए हैं।ऐसे में आलू की जगह अब दूसरी फसल किसान अपने खेतों में लगाने को मजबूर हैं।झारखंड में किसान आलू के बीज महंगा होने की वजह से काफी परेशान हैं।

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दरअसल, सरकार के द्वारा किसानों को सब्सिडी दर पर आलू के बीज उपलब्ध कराए जाते थे।लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ जिससे किसान काफी परेशान हैं। 40 से 50 रुपए तक आलू के बीज बाजार में बेचे जा रहे हैं।ऐसे में किसान मजबूरन आलू की खेती छोड़ रहे हैं और अपने खेतों में दूसरे फसल लगा रहे हैं।कांके के होचर के किसानों की मानें तो आलू की कीमत में अभी बेतहाशा वृद्धि हो गई है।जिससे बीज और खाद भी महंगे हो गए हैं।ऐसे में आलू की खेती में जितनी लागत लगती है, उतनी आमदनी नहीं होती है।साथ हीं पिछले वर्ष अधिक कुहासा गिरने की वजह से आलू के फसल को काफी नुकसान हो गया,

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इस डर से भी किसान आलू की खेती नहीं करना चाहते हैं।भले ही आलू अभी महंगा है।लेकिन जब हमारे खेत मे आलू तैयार होता है, तभी 10 रुपए किलो के दर से भी कीमत नहीं मिलता है।वहीं, मौसम की दृष्टि से आलू की बुआई का काम अक्टूबर से शुरू होकर 15 नवंबर के आसपास तक कर दिया जाता है।इस वक्त बुवाई का सीजन है, जबकि आलू के दामों से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं। किसानों के अनुसार, वर्तमान में उन्हें आलू का बीज 1800 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल खरीदना पड़ रहा है। मुख्य वजह यह भी है कि जब तक फसल तैयार हो जाएगी और वो उत्पाद लेकर बेचने जाएंगे तो माल के अचानक बढ़ोत्तरी से बिचौलियों व व्यापारियों द्वारा उनका माल अधिकतम 700 से 800 रुपए क्विंटल में खरीदा जाएगा।ऐसे में लागत और चार महीने की मजदूरी निकाल पाना भी उनके लिए बहुत मुश्किल होगा।सरकार की ओर से आलू की खरीद का रेट तय नहीं होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है,

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जबकि बिचौलियों व व्यापारियों द्वारा उसी माल को कोल्ड स्टोरेज कराकर बेचने में मुनाफा है।कुछ जगह सुविधाएं मुहैया होने से यह काम पहले से ही होने लगता है.अभी चल रहे अधिक भाव की वजह से किसानों ने बड़ा आलू होने से पहले ही निकालना शुरू कर दिया है जिस वजह से रांची, खूटी और आसपास के कुछ इलाकों से अगाती आलू अभी से बाजार में आना शुरू हो गया है।ओर नया आलू 60 रुपए तक बाजार में बिक रहा है, पर कायदे से देखा जाए तो मुख्य फसल फसल जनवरी से फरवरी के बीच में ही आएगी।झारखंड में इससे पहले कभी भी आलू के दामों में इतनी तेजी नहीं हुई थी। लेकिन नए आलू आने के बाद भी आलू की कीमत आसमान छू रही है।दुकानदारों-व्यापारियों की मानें तो कम से कम 40-50 साल का रिकॉर्ड टूट गया।

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कभी इतना तेजी नहीं हुआ, अगर आलू की बात करें तो मंडी में पुराना आलू 1800 पैकेट 3600 क्विंटल, खुदरा में पुराना आलू 40-45 प्रति किलों मिल रहा है।वहीं, नया आलू मंडी में 4300 रुपए क्विंटल, खुदरा में 55-60 रुपए बिक रहा है।मंडी के दुकानदारों की मानें तो आलू बाहर से आता था, उतना नहीं आ रहा है। बारिश की वजह से खराब हुआ है और ट्रांसपोर्टिंग भी अधिक लग रहा है। लेकिन अभी लोकल आलू आने तक रेट कम होने का कोई उम्मीद नहीं है।

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