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Jharkhand news:झारखंड सहित देश भर में हर्षोल्लास के साथ करमा मनाया जा रहा,क्यों मनाते है करमा जानिए इसकी विशेषता

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NEWSTODAYJ_रांची: प्रकृति का महापर्व करमा आदिवासियों के प्रमुख त्योहारों में से एक है. भादो मास की एकादशी को झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित देश भर में हर्षोल्लास के साथ करमा मनाया जाता है. इस पर्व की एक अनोखी कहानी है जो प्रकृति से जुड़ी है.

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ऐसा कहा जाता है कि करमा और धर्मा दो भाई थे. दोनों बहुत मेहनती और दयावान थे. वहीं, करमा की पत्नी अधर्मी और दूसरों को परेशान करने वाली विचार की थी. यहां तक कि धरती मां का भी अपमान कर देती थी जिससे करमा बहुत दुखी हो गया और वह एक दिन घर छोड़कर चला गया. करमा के जाते ही पूरे इलाके के कर्मों-किस्मत उसके साथ चला गया. पूरा इलाके में अकाल पड़ गया. सभी जीव-जंतु परेशान रहने लगे. इसको देख धर्मा अपने भाई करमा को ढूंढने निकल गया.

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जब धर्मा अपने भाई करमा को ढूंढ कर गांव वापस आने लगा तो सभी जीव-जंतु अपनी पीड़ा बताने लगे. तभी करमा ने सभी को अपना कर्म बताया और दूसरों को परेशान नहीं करने की सलाह दी. घर लौटने के बाद करमा ने डाल को पोखर में गाड़कर पूजा की. उसके बाद पूरे इलाके में खुशहाली लौटाई और सभी खुशी-खुशी आनंद से रहने लगे. इसी को याद कर करमा पूजा मनाया जाने लगा. इससे यह स्पष्ट होता है कि कर्म के अनुरूप ही फल मिलता है.

भाई-बहन के अटूट रिश्ते को दर्शाता है यह पर्व

 

करमा पर्व की कई विशेषताएं हैं. इसमें आदिवासियों की सभ्यता, संस्कृति और इनकी परंपरा देखने को मिलती है. इस पर्व में खानपान, गीत-संगीत का भी खास महत्व होता है. भादो माह के आगमन के साथ ही लोगों के दिलो-दिमाग में करमा गीत का परवान चढ़ने लगता है. करमा पूजा भाई-बहनों के अटूट रिश्ते को दर्शाती है. बहनें अपने भाई के उज्ज्वल भविष्य के लिए पूजा करती हैं और करम वृक्ष की तरह अपने भाई की दीर्घायु और परिवार में खुशहाल जीवन के लिए कामना करती है. आदिवासी समाज के लोग इस पर्व को इतना महत्वपूर्ण मानते हैं कि अपने जीवन की सभी शुभ काम की शुरुआत इसी दिन से करते हैं.

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