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Food items costs rise:खाने-पीने के सामानों की कीमतों में उछाल,खुदरा महंगाई दर 6.95 प्रतिशत पर पहुंची

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NEWSTODAYJ_नई दिल्ली. खाने-पीने के सामानों की कीमतों में उछाल की वजह से मार्च में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा महंगाई दर 6.95 प्रतिशत पर पहुंच गई. मंगलवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में खुदरा महंगाई दर 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. फरवरी में खुदरा महंगाई दर 6.07 फीसदी थी. यह लगातार तीसरा महीना है, जब खुदरा महंगाई दर छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है. इससे पहले अक्टूबर, 2020 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.61 फीसदी के उच्चस्तर पर थी.

 

 

 

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इम्प्लीमेंटेशन की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक, मार्च में खुदरा खाद्य महंगाई दर एक महीने पहले के 5.85 प्रतिशत के स्तर से बढ़कर 7.68 प्रतिशत पर पहुंच गई है. सबसे ज्यादा तेजी सब्जियों और तेल के दामों में रही है. मार्च में खाने-पीने के सामान के दाम में 7.68 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

 

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फरवरी महीने में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 5.85 प्रतिशत थी.पिछले साल मार्च 2021 में खुदरा महंगाई दर 5.52 प्रतिशत और खाद्य सामग्री की महंगाई दर 4.87 प्रतिशत थी. मार्च महीने में लगातार तीसरे महीने खुदरा महंगाई दर आरबीआई की ओर निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा रही है. रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक समीक्षा में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़ों के आधार पर तय करता है. आरबीआई ने सरकार को खुदरा महंगाई दर दो से छह प्रतिशत के दायरे में रखने का लक्ष्य दिया है. मगर जनवरी-मार्च की तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति औसतन 6.34 प्रतिशत रही है.

 

 

नेशनल स्टैटिस्टिक्स ऑफिस (NSO) के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से खाद्य तेलों की कीमतों में उछाल आया है. इस अवधि में तेल की कीमतों में महंगाई दर 18.79 प्रतिशत पर पहुंच गई है. मार्च में सब्जियों के दाम 11.64 प्रतिशत बढ़े जबकि मांस और मछली की कीमतों में 9.63 प्रतिशत का इजाफा हुआ.बता दें कि रिजर्व बैंक ने पिछले सप्ताह अपनी चालू वित्त वर्ष की पहली मौद्रिक समीक्षा में 2022-23 के लिए मुद्रास्फीति के अनुमान को बढ़ाकर 5.7 प्रतिशत कर दिया था. पहले केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के 4.5 प्रतिशत पर रहने का अनुमान लगाया था. अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा खुदरा महंगाई दर हमारी हमारी उम्मीदों से अधिक बढ़ी है. महंगाई में यह इजाफा खाद्य तेल की बढ़ी कीमत के कारण हुआ है. उन्होंने बताया कि अगर महंगाई कम नहीं होती है तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सिलसिला जून, 2022 से शुरू हो सकता है.

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