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Dhanbad news:15 साल की दशवी की छात्रा अंशिका ने लिख डाली विकृत सामाजिक सोच पर किताब…..

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Dhanbad news:15 साल की दशवी की छात्रा अंशिका ने लिख डाली विकृत सामाजिक सोच पर किताब…..

 

NEWSTODAYJ_धनबाद :आखिर ऐसा क्या है कि बच्चों के आत्महत्या की खबरें आम होती जा रही हैं। क्या किसी ने सोचा कि छात्र..नौजवान हर कोई थोड़ी-थोड़ी बात पर जान देने के लिए क्यों आमादा हैं?वर्तमान परिस्थितियों में पुलिस भी आत्महत्या करने के कारणों का पता लगाने का प्रयास नही करती। दिल्ली पब्लिक स्कूल की महज 15 साल की दशवी की छात्रा अंशिका ने लॉकडाउन के दौरान कोरोना काल में इन सभी मुद्दों को समेटते हुए एक किताब लिख डाली। अपने साढे तीन सौ पन्नों के किताब “द पेंटेंड पोर्च” में आत्महत्या के सामाजिक कारणों और प्रकारों पर विस्तार से अपनी बात रखी है और विकृत सोच रखने वाले समाज के लोगों को एक संदेश देने का प्रयास किया है।

अंशिका कहती हैं कि सामान्यत: बच्चो में आत्महत्या की प्रवृत्ति नहीं होती है ,और कई बार संदेहास्पद परिस्थितियों में मृत्यु का कारण आत्महत्या मानकर समाज और व्यवस्था उसे स्वीकार कर लेता है।जबकि गहराई से पड़ताल करने पर यह मालुम चलता है की आत्महत्या नहीं वह तो हत्या थी। आपको जानकर यह आश्चर्य होगा की ऑनलाइन क्लास करने के बाद 15 वर्षीय अंशिका ने इतनी छोटी उम्र में एक किताब लिख डाली।250 रूपए की यह किताब ऑनलाइन साइट अमेजन , फिल्पिकार्ट से लेकर अन्य जगहों पर उपलब्ध है इन दिनों यह किताब काफी चर्चा में भी है दिल्ली पब्लिक स्कूल में दसवीं की छात्रा अंशिका के पिता पंकज प्रसाद अधिवक्ता स्मिता सिन्हा गृहनी है

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स्टील गेट के पास परिवार रहता है अंशिका ने कहा कि उसे किताब पढ़ने का शौक है। और इसी कारण उसमे किताब लिखने की इच्छा भी जागृत हुई।हाल ही में नोशन प्रेस चेन्नई ने इसका प्रकाशन किया है ।अक्टूबर 2018 में भी उसने एक किताब “वॉइस ऑफ द ब्लॉसम एंड द अदर स्टोरी “लिखी थी जो प्रकाशित भी हुई थी ।इस काम में उसे मम्मी पापा और भाई का पूरा सहयोग मिला ।

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