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Dhanbad news:कोयलांचल में आदिवासियों के पर्व करमा की चारों ओर धूम,बगदाहा पचायत में करमा पूजा का आयोजन,

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NEWSTODAYJ_झारखंड में हर ओर आदिवासियों के पर्व करमा की धूम देखी जा रही है। इस अवसर आजसू नेता हलधर महतो ने धनबाद के राजगंज स्थित बगदाहा पचायत में करमा पूजा का आयोजन किया साथ ही उन्होंने बताया कि पहले इस पर्व को झारखंडीयों के द्वारा कई टुकड़ि में मनाया जाता था लेकिन लगातार पिछले 7 वर्षों से पर सारी टुकड़ियों को छोड़कर एकत्रित होकर हम लोग बगदाहा पंचायत स्थित फुटबॉल ग्राउंड में मनाते आ रहे हैं ।

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यह पूजा झारखंड के मूल निवासियों के लिए विशेष महत्व रखती है क्योंकि हम झारखंडी हैं और झारखंड की संस्कृति को बचाना हमारा मुख्य उद्देश्य है इसलिए इस पूजा को हम लगातार बीते कई पीढ़ियों से मनाते आ रहे हैं और आगे भी मनाते रहेंगे ।

आजसू नेता हलधर महतो ने इस पूजा के बारे में विस्तृत जानकारी मीडिया से शेयर करते हुए कहा कि आदिवासी प्रकृति की पूजा कर अच्छे फसल की कामना करते हैं। साथ ही बहनें अपने भाइयो की सलामती ले लिए भी प्रार्थना करती है करमा पर झारखंड के आदिवासी ढोल और मांदर की थाप पर झूमते-गाते हैं। यह दिन इनके लिए प्रकृति की पूजा का है।

ऐसे में ये सभी उल्लास से भरे होते हैं। परम्परा के मुताबिक, खेतों में बोई गई फसलें बर्बाद न हों, इसलिए प्रकृति की पूजा की जाती है।इस मौके पर एक बर्तन में बालू भरकर उसे बहुत ही कलात्मक तरीके से सजाया जाता है। पर्व शुरू होने के कुछ दिनों पहले उसमें जौ डाल दिए जाते हैं।

इसे ‘जावा’ कहा जाता है। यही जावा आदिवासी बहनें अपने बालों में गूंथकर झूमती- नाचती हैं। आदिवासी बहनें अपने भाइयों की सलामती के लिए इस दिन व्रत रखती हैं. इनके भाई ‘करम’ वृक्ष की डाल लेकर घर के आंगन या खेतों में गाड़ते हैं। इसे वे प्रकृति के आराध्य देव मानकर पूजा करते हैं। पूजा समाप्त होने के बाद वे इस डाल को पूरे धार्मिक रीति से तालाब, पोखर, नदी आदि में विसर्जित कर देते हैं।

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