CM हेमंत के हस्तक्षेप के बाद झारखण्ड के 12 हजार मजदूरों को मिलेगा उनका सारा हक़

NEWSTODAYJ –  झारखंड के मजदूरों के लिए अच्छी खबर है दरअसल सरकार के हस्तक्षेप के बाद दुमका और संताल के 11815 आदिवासी मजदूरों को भारत-चीन सीमा पर बिना बिचौलियों के सीधे बीआरओ वाजिब मजदूरी पर पूरे तौर तरीके के साथ काम देगा। CM हेमंत सोरेन ने वापस आये मजदूरों की आपबीती सुनने के बाद सरकार और बीआरओ के बीच लंबा विमर्श हुआ। मामला रक्षा मंत्रालय पहुंचा और मुख्यमंत्री ने मजदूरों के शोषण की जानकारी दी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने एक विशेष टीम गठित कर बीआरओ के साथ तमाम मुद्दों पर वार्ता कराई। कई दिनों के मंथन के बाद दोनों पक्ष के बीच इंटर स्टेट लेबर एक्ट 1979 और वर्क्समैन कंपनसेशन एक्ट 1923 के तहत मजदूरों को निर्धारित मजदूरी, स्वास्थ्य सुविधायें, दुर्घटना लाभ, यात्रा भत्ता, आवास लाभ आदि लाभ देने पर लिखित सहमति बन गई है।

मुख्यमंत्री ने वैधानिक शर्तों और श्रमिकों को सभी लाभ देने की शर्त पर लिखित सहमति मिलने के बाद मजदूरों ले जाने की अनुमति बीआरओ को दी है। अब श्रमिकों को तय दर से 20 प्रतिशत अधिक मजदूरी सीधे उनके बैंक खाते में मिलेगी। बीआरओ और उपायुक्त के बीच पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद श्रमिक जाएंगे। बिचौलियों की भूमिका खत्म की गई है। चिकित्सा सुविधा, यात्रा भत्ता, कार्य स्थल पर सुरक्षा, आवास लाभ भी मिलेगा।

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बताते चले की संताल परगना से हजारों आदिवासी श्रमिक 1970 से लेह-लद्दाख के दूरगम स्थान, कठिनतम चोटियों और दर्रों पर विशेषकर सड़क और सुरंग बनाने जाते हैं। बीआरओ अपने स्थानीय नेटवर्क की मदद से इन्हें साल में दो बार ले जाता है। श्रमिक एक बार अप्रैल-मई में जाते हैं, इन्हें सितंबर तक लौटना होता है। दूसरी बार अक्तूबर-नवंबर के दौरान मजदूर जाते हैं और फरवरी में लौटने लगते हैं। लेकिन इस बार लॉकडाउन के कारण श्रमिक फंस गए। श्रमिकों ने सीएमओ और कॉल सेंटर से संपर्क कर वापसी की गुहार लगाई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और साथ ही हम सीमा क्षेत्रों में राष्ट्र की सेवा करते हुए अपने श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने को समान प्राथमिकता देते हैं। राज्य सरकार केंद्रीय रक्षा मंत्रालय को सहयोग देने के लिए सदैव तैयार है।

 

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