Bye election : झामुमो के लिये प्रतिष्ठा और साख बचाने की चुनौती , दुमका पहुचे मुख्यमंत्री…

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Bye election : झामुमो के लिये प्रतिष्ठा और साख बचाने की चुनौती , दुमका पहुचे मुख्यमंत्री…

NEWSTODAYJ : दुमका जिले में झामुमो के लिये दुमका उप चुनाव प्रतिष्ठा के साथ साथ साख बचाने की चुनौती होगी। यह विधानसभा सीट कई मायनों में महत्वपूर्ण रही है। उप चुनाव की तारीख की घोषणा एक दो दिनों में घोषित होने की संभावना है। लेकिन उप चुनाव के लिए सियासी सरगर्मी परवान चढ़ चुकी है। झामुमो के कार्यकारी अध्यछ और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चुनावी बिगुल फूंकने तीन दिवसीय दौरे पर आज दुमका पहुंच चुके हैं।

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इधर भाजपा भी उपचुनाव को लेकर रेस हो चुकी है।झारखण्ड की उप राजधानी दुमका कभी झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के मज़बूत किले के रूप में माना जाता था। दुमका विधानसभा सीट झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के द्वारा छोड़े जाने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।पिछले विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन ने भाजपा प्रत्याशी लुईस मरांडी को हराकर इस सीट पर जीत हासिल की। हालांकि 2014 का चुनाव वह लुइस मरांडी के हाथों पराजित हुए थे।

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झारखंड की दो विधानसभा सीटों, दुमका और बेरमो के लिए उपचुनाव की तिथि निर्वाचन आयोग द्वारा अभी तय नहीं की गयी है। पर यह माना जा रहा है कि बिहार उपचुनाव के साथ ही इन दो विधानसभा के भी उप चुनाव होंगे।उप चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। झामुमो के लिए दुमका प्रतिष्ठा की सीट इसलिये भी है कि मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने जीत के बाद इस सीट को खाली की है।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज से तीन दिवसीय संताल परगना की यात्रा पर हैं, इस यात्रा को दुमका उप चुनाव की चुनावी जंग जीतने के लिये अहम माना जा रहा है।

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संताल परगना वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन का मज़बूत किला माना जाता था,पर शिबू सोरेन की पराजय ने झामुमो के इस मज़बूत किले को कमज़ोर बना दिया।शिबू सोरेन की दुमका सीट से हार के बाद झामुमो को गहरा धक्का लगा था।भाजपा ने संतालपरगना में जो बढ़त 2019 लोकसभा चुनाव में बनायी थी उसे वह कायम रख पाने में पूरी तरह विफल रही और इसका एक मात्र कारण पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास बताये जाते हैं।संताल परगना में भाजपा की गुटबाजी से विधानसभा चुनाव में उसे करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।पिछले विधानसभा चुनाव में झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमन्त सोरेन दो विधानसभा सीट बरहेट और दुमका से चुनाव लड़ रहे थे,

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उन्हें दोनों सीट पर जीत हासिल हुई थी।तत्कालीन मंत्री लुइस मरांडी को 13 हजार से अधिक मतों से हार का मुंह देखना पड़ा था।विधानसभा चुनाव में झामुमो को जबरदस्त वापसी के बाद हेमन्त सोरेन राज्य के मुख्यमंत्री बने।मुख्यमंत्री बनने के लगभग एक वर्ष बाद हेमंत सोरेन चुनावी मैदान में झामुमो को जीत दिलाने के लिये स्वयं मैदान में उतर चुके हैं।विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद झारखंड भाजपा में कमज़ोर प्रदेश अध्यक्ष रहे लक्ष्मण गिलुवा के स्थान पर आनन फानन में बाबूलाल मरांडी को पार्टी में शामिल करवाया गया है।वहीं प्रदेश की कमान अब लक्ष्मण गिलुआ की जगह दीपक प्रकाश के हाथों में है। पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी और दीपक प्रकाश की जोड़ी से भाजपा को यह उम्मीद जगी है।

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कि वह उप चुनाव अपनी हारी हुयी सीट को पुनः हासिल करने में कामयाब रहेगी। वहीं भाजपा का एक बड़ा तबका लुईस मरांडी के स्थान पर किसी अन्य को मैदान में उतारने का पक्षधर है। दुमका विधानसभा उपचुनाव में झामुमो की ओर से मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के भाई युवा मोर्चा के अध्यक्ष बसंत सोरेन के उम्मीदवार बनने की चर्चा है।सोरेन परिवार की इस परंपरागत सीट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हर हाल में कब्ज़ा बनाये रखना चाहते हैं ।वहीं भाजपा संताल परगना में 2019 लोकसभा चुनाव के करिश्माई जीत के लिये कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है।

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