• झारखंड का उभरता न्यूज़ पोट्रल न्यूज़ टुडे झारखंड में आप के गली मोहलले के हर खबर अब आप के मोबाइल तक आप के गली मोहल्ले की हर खबर को हम दिखाएंगे प्रमुखता से हमारे न्यूज़ टुडे झारखंड के संवादाता से संपर्क करे,ph..No धनबाद, 9386192053,9431143077,93 34 224969,बोकारो,+91 87899 12448,लातेहार,+919546246848,पटना,+919430205923,गया,9939498773,रांची,+919334224969,हेड ऑफिस दिल्ली,+919212191644,आप हमें ईमेल पर भी संपर्क कर सकते है हमारा ईमेल है,NEWSTODAYJHARKHAND@GMAIL........झारखंड के हर कोने कोने की खबर अब आप के मोबाइल तक सबसे पहले आप प्ले सटोर पर भी न्यूज़ टुडे झारखंड के ऐप को इंस्टॉल कर सकते है हर तरह के वीडियो देखने के लिए सब्सक्राइब करे यूट्यूब पर NEWSTODAYJHARKHAND......विज्ञापन के लिए संपर्क करे...9386192053.9431134077

Bollywood:सुर सम्राट मोहम्मद रफी की जन्म जयंती आज, जानिए उनके जिंदगी के कुछ अनछुए पहलुओं को

1 min read

NEWSTODAYJ_हैदराबाद : ‘ओ दूर के मुसाफिर…हमको भी साथ ले ले…हम रह गए अकेले’ ‘ट्रेजडी किंग’ दिलीप कुमार अभिनीत फिल्म ‘उड़न खटोला’ (1955) का यह दर्दभरा गाना मोहम्मद रफी की रह-रहकर उनके फैंस को याद दिलाता रहता है. रफी साहब ने हिंदी सिनेमा पर अपनी पार्श्व गायकी से अमिट छाप छोड़ी है. हिंदी सिनेमा के दिवंगत पार्श्व गायक मोहम्मद रफी की 24 दिसंबर को 97वीं जयंती (Mohammad Rafi Birth Anniversary) है. इस मौके पर जानेंगे देश के इस अनमोल गायक से जुड़ीं कुछ खास बातों के बारे में..

 

 

मोहम्मद रफी साहब का जन्म 24 दिसंबर 1924, को कोटला सुल्तान सिंह, (अमृतसर में एक गांव) पंजाब में हुआ था.Mohammed Rafiमोहम्मद रफीपंजाब में पैदा होने के बाद वह परिवार संग लाहौर (पाकिस्तान) में शिफ्ट हो गए थे. मोहम्मद रफी का निक नेक फीको था.

यह भी पढ़े…Bollywood:खूबसूरत एक्ट्रेस सुष्मिता सेन का ब्वायफ्रैंड से हुआ ब्रेकअप,काफी सालों से थे रिश्ते में

 

 

मोहम्मद रफी 13 साल की उम्र में रफी साहब ने लाहौर में पहली बार अपनी गायकी का हुनर दिखाया था.

1944 में मोहम्मद रफी ने लाहौर में जीनत बेगम के साथ ड्यूट सॉन्ग ‘सोनिये नी, हीरिये नी’ से अपने गायन की शुरुआत की थी. इसके बाद रफी साहब को ऑल इंडिया रेडियो (लाहौर) ने गाने के लिए आमंत्रित किया था.

मोहम्मद रफी ने 1945 में फिल्म ‘गांव की गोरी’ से हिंदी फिल्मों में डेब्यू किया था.1948 में महात्मा गांधी की राजनीतिक हत्या पर मोहम्मद रफी ने हुस्नलाल भगतराम और राजेंद्र कृष्णा संग मिलकर रातों-रात गीत ‘सुनो-सुनो ऐ दुनियावालों, बापूजी की अमर कहानी’ तैयार किया था.

रफी साहब का यह गाना सुन तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू बहुत प्रभावित हुए थे और उन्होंने रफी को यह गाना गाने के लिए अपने घर बुला लिया था.

लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी :1948 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने रफी ​​को रजत पदक से सम्मानित किया था.

1967 में भारत सरकार ने मोहम्मद रफी को पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया था.मोहम्मद रफी ने अपने गायकी के करियर में चार हजार से ज्यादा हिंदी, क्षेत्रीय भाषाओं में 100 से ज्यादा और पर्सनल 300 से ज्यादा गाने गाए थे.मोहम्मद रफी ने कई भाषाओं में गाने गाए, जिसमें असमिया, कोंकणी, भोजपुरी, अंग्रेजी, फारसी, डच, स्पेनिश, तेलुगु, मैथिली, उर्दू, गुजराती, पंजाबी, मराठी, बंगाली आदि शामिल हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published.