Ajmer Dargah open : अजमेर दरगाह में 72 घंटे के लिए बाबा फरीद का चिल्ला खुला , पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन पर पाबंदी…

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Ajmer Dargah open : अजमेर दरगाह में 72 घंटे के लिए बाबा फरीद का चिल्ला खुला , पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन पर पाबंदी…

  • दरगाह में जायरीन के प्रवेश बंद होने से सिर्फ पासधारी खादिमों ने ही चिल्ले की जियारत की।
  • हर साल मोहर्रम के मौके पर चिल्ले की जियारत के लिए जायारीन की कतार लगती थी।

NEWSTODAYJ (एजेंसी) : अजमेर। सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में बाबा फरीद का चिल्ला सोमवार को तड़के खोल दिया गया। यह चिल्ला 72 घंटे के लिए खोला गया है। दरगाह में जायरीन के प्रवेश बंद होने से सिर्फ पासधारी खादिमों ने ही चिल्ले की जियारत की। दरगाह के खादिम एस एफ हसन चिश्ती ने बताया कि यह चिल्ला 3 दिन खुला रहेगा।

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मोहर्रम की 4 तारीख पर अल सुबह बाबा फरीद का चिल्ला खोल दिया गया था। हर साल मोहर्रम के मौके पर चिल्ले की जियारत के लिए जायारीन की कतार लगती थी, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के चलते आम जायरीन के दरगाह जियारत पर पाबंदी है। सिर्फ वही खादिम इसकी जियारत कर सकेंगे, जिन्हें पास मिले हुए हैं।

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वहीं आज मोहर्रम माह की 5 तारीख होने से चांदी का ताजिया जियारत के लिए दरगाह की महफिल खाना की सीढ़ी पर रात 1.30 बजे तक के लिए रखा गया। उसे देर रात दरगाह के लंगर खाना में इमाम बारगाह में लाकर रख दिया जाएगा।वही कोविड 19 के दौर में सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन पर पाबंदी से खफा कुछ मुस्लिम युवा खादिमों ने 28, 29 व 30 अगस्त को ताजिया की सवारी निकालने की अनुमति देने की आवाज उठाई है।

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युवाओं ने जिला प्रशासन को चेतावनी दी है कि दो दिन में इसकी इजाजत नहीं दी गई तो वे निजाम गेट पर धरना देंगे। इस मांग से जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया है। प्रशासन ने सभी ऐहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। खादिमों को कहना है कि 20 मार्च से दरगाह में जायरीन का प्रवेश नहीं है।खादिम गाइडलाइन का पालन कर रहे हैं। प्रशासन व सरकार के गाइड लाइन की पालना करते हुए ही खादिम मोहर्रम के सभी कार्यक्रम घरों में ही कर रहे हैं किन्तु ताजिया की सवारी भी गाइड लाइन का पालन करते हुए निकालने की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके लिए युवा खादिमों ने सैयद इमरान चिश्ती के नेतृत्व में मुख्यमंत्री के नाम कलक्टर को ज्ञापन भी दिया।

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ज्ञातव्य है कि बाबा फरीद का मजार पाकिस्तान के पाक पट्टन में है। उनका वहां मोहर्रम की पांच तारीख को उर्स मनाया जाता है। उनके उर्स के मौके पर ही अजमेर स्थित चिल्ला खोला जाता है। बाबा फरीद ने यहां चालीस दिन इबादत की थी। उसी जगह को चिल्ला कहा जाता है।

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