गर्भवती महिला कानून के दर पर इंसाफ़ मांग रही है,आख़िर उसके साथ हुआ क्या है पढ़े हमारी इस ख़ास रिपोर्ट…

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NEWSTODAYJ गढवा : ख़्वाब देखा जन्नत का,पर दोज़ख़ हुई ज़िंदगी,यह मात्र एक जुमलानुमा कुछ शब्द नहीं बल्कि निःशब्द कर देने वाली एक विवाहिता की कहानी है,जिसे आज उसके शौहर ने दर दर भटकने को विवश कर दिया है,आलम है कि वह गर्भवती महिला कानून के दर पर इंसाफ़ मांग रही है,आख़िर उसके साथ हुआ क्या है पढ़े हमारी इस ख़ास रिपोर्ट में।

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स्नेहा खान – पीड़िता एवं स्नेहा का माँ

निकाहनामे के पन्ने को खुद पलटने के साथ उसे हमें दिखाते हुए जार बेज़ार रोती ये है स्नेहा खान,जिसने आज से से तीन साल पहले हर लड़की के माफ़िक शादी का ख़्वाब संजोया था,उसका ख़्वाब निक़ाह के रूप में हक़ीक़त हुआ,वह अपने घर की देहरी से निकल अपने शौहर के साथ हंसी ख़ुशी विदा हुई,एक सपना सच हुआ था तो दूसरा ख़्वाब रूह में हिलोरे ले रहा था,वह पूरे रास्ते सपना बुनते हुए ससुराल पहुंचती है,उस रोज़ तो हर बहु की तरह उसका भी सभी के द्वारा इस्तक़बाल किया जाता है,उसका अपने शौहर से मिलन होता है,शुरुआत में तो वह जमीं पर जन्नत के मानिंद जिंदगी बसर कर रही थी,पर उसे क्या इल्म था कि बस कुछ ही दिनों में उस पर दोज़ख जैसा सितम होने वाला है,अभी वो ख़्वाब की हसीन दुनिया मे जी ही रही थी एकाएक उसकी नींद तब खुलती है जब उस पर जां निसार करने वाला उसका शौहर उसे ताना देने लगता है,उसे कुछ अजीब जरूर लगा,पर उसे वो नजरअंदाज कर गयी,लेकिन कुछ दिन बाद ही वह ताना यातना में बदल गया और दिन प्रतिरोज़ उस पर ज़ुल्म-वो-सितम ढाया जाने लगा,जब उससे भी उसके शौहर का मन नहीं भरा तो उसे घर से निकालने के साथ साथ उसने दूसरी लड़की से निकाह भी कर लिया,कुछ माह की गर्भवती स्नेहा आज पुलिस के पास पहुंच इंसाफ़ मांग रही है।

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स्नेहा खान – पीड़िता

बेटी को ले कर थाना पहुंची स्नेहा की मां भी कहती हैं की हमलोगों को शुरुआत में तनिक भी अहसास नहीं हुआ कि हमारी बेटी के ऊपर ऐसा जुल्म-वो-सितम किया जाएगा,मारने पीटने और प्रताड़ित करने के साथ साथ उस लड़के द्वारा यानी स्नेहा के शौहर ने बिना तलाक दिए दूसरी शादी भी कर लिया,क्या होगा मेरी बेटी का,इतना कहते ही फ़फ़क कर रो पड़ती हैं।

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स्नेहा खान की माँ

कहा जाता है कि मायके से लड़की की डोली निकलती है जबकि ससुराल से अर्थी,पर यहां स्नेहा के हालात तो यही तस्दीक़ कर रहे हैं कि उसके जीते जी ससुराल से उसकी अर्थी निकल गयी,एक तरफ़ जार बेज़ार रोती स्नेहा तो दूसरी ओर बेटी के दुख से हर क्षण दोहरी होती मां,अब देखना यह होगा कि पीड़ित स्नेहा को कानून के दर से कब तलक इंसाफ़ मिलता है..?

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