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हेमंत सरकार केंद्र के फैसले के साथ खड़ी-लॉकडाउन को लेकर मोदी ने 15 मई तक राज्यों से मांगा रोड मैप

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हेमंत सरकार केंद्र के फैसले के साथ खड़ी-लॉकडाउन को लेकर मोदी ने 15 मई तक राज्यों से मांगा रोड मैप

NEWS TODAY रांची –  प्रधानमंत्री से बात करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि लॉकडाउन पर आगे केन्द्र सरकार का जो भी निर्णय होगा, झारखंड सरकार उसी के अनुरूप चलेगी. सीएम ने कहा कि राज्यों द्वारा अलग-अलग फैसला लेना उचित नहीं है. केन्द्र का ही निर्णय मान्य होगा. कई राज्यों ने लॉकडाउन बढ़ाने की मांग की है, लेकिन झारखंड सरकार को केन्द्र के फैसले का इंतजार है. जहां तक छूट की बात है तो इस पर अधिकारी काम कर रहे हैं कि क्या और कैसे छूट दी जाए.

प्रधानमंत्री ने 17 मई के बाद लॉक डाउन का स्वरूप कैसा होना चाहिए, क्या-क्या रियायतें दी जानी चाहिए, इसे लेकर सभी राज्यों से 15 मई के पहले रोड मैप तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने को कहा है. ताकि राज्य द्वारा मिले सुझाव के अनुरूप चौथे चरण के लॉकडाउन की रणनीति केंद्र सरकार तैयार कर सके. राज्यों से यह भी कहा कि लॉकडाउन को लेकर अपने राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप रेड जोन, ऑरेंज जॉन या ग्रीन जोन में तब्दील कर छूट को लेकर निर्णय लिया जा सकता है.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा की कोरोना संकट की इस मुश्किल घड़ी में लोगों की जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है. हालांकि आर्थिक मजबूती भी बेहद जरूरी है. ऐसे में जीवन और जीविका के बीच संतुलन बनाकर हमें कार्यों को अंजाम देने के लिए आगे आना होगा. इसमें केंद्र सरकार का सहयोग अपेक्षित है. उन्होंने प्रधानमंत्री को इस बात से भी अवगत कराया कि झारखंड में कोरोना से रिकवरी रेट 50% तक पहुंच चुकी है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मजदूरों के वापस आने से राज्यों की चुनौतियां बढ़ रही हैं. सबसे बड़ी चुनौती उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना है. ऐसे में केंद्र सरकार से पर्याप्त सहयोग की उम्मीद है. उन्होंने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर भी आकृष्ट कराया कि प्रवासी मजदूरों के लौटने का सिलसिला जारी है. अभी झारखंड में मात्र 50 से 55 हजार प्रवासी मजदूर ही लौट पाए हैं. जबकि इनकी संख्या लगभग 7 लाख है. ऐसे में प्रवासी मजदूरों को इन विषम परिस्थितियों में उनके घर तक पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार कोई ठोस उपाय करें ताकि उन पर पनप रहे भय को भी दूर किया जा सके.

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को रोजगार से जोड़ने के लिए मनरेगा की योजनाओं को लागू करने पर विशेष जोर दिया जाए. मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि मनरेगा का बजट और मानव दिवस सृजन को 50% तक बढ़ाया जाए और मनरेगा की मजदूरी दर में भी बढ़ोतरी की जाए. उन्होंने कहा कि मनरेगा को तरजीह मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में खनन कार्य की काफी अहमियत है. इस राज्य को खनन से काफी राजस्व की प्राप्ति होती है. ऐसे में कोरोना संकट के इस दौर में कर संग्रह प्रणाली को थोड़ा बदला जाए ताकि राज्य अपने संसाधनों की बदौलत राजस्व वसूली कर सके. इससे राज्यों की वित्तीय हालत सुधरेगी. मुख्यमंत्री में प्रधानमंत्री से जीएसटी की राशि भी देने का आग्रह किया.

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