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हमने तो किताबों में पढ़ा था कि परिश्रम का फल मीठा होता है।किसी भी कार्य को करने के लिए जुनून,उत्साह व लग्न चाहिए………

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गढ़वा।

हमने तो किताबों में पढ़ा था कि परिश्रम का फल मीठा होता है।किसी भी कार्य को करने के लिए जुनून,उत्साह व लग्न चाहिए………

(संवाददाता-विवेक चौबे)
वक्त कभी भी करवट बदल सकता है….
जी हां, सवाल का जबाब मात्र एक ही है।
दास्तान भी कुछ ऐसी ही है कि गरीबी में पले बढ़े।समय कब रंक से राजा बना दिया ? भाग्य कब बदल गया ? पता तक नहीं चला।
करत-करत अभ्यास के जड़ मति होत सुजान।
रसरी आवत-जात ते शील पर पड़त निशान।।
लगातार प्रयत्न करने से असम्भ कार्य भी सम्भव हो जाता है।
समाज,प्रखण्ड व जिले का नाम किया रौशन
गढ़वा। मध्यप्रदेश,इटारसी,होशंगाबाद के रहने वाले अजय कुमार इनदिनों खूब चर्चे में हैं। आपको बता दें कि गायकी क्षेत्र में शौक के साथ-साथ सुरीली व मधुर आवाज में गाते अजय कुमार श्रीवास्तव का नाम प्रसिद्ध हो गया।इन्होंने स्नातक उतीर्ण किया।इनके पिता जा नाम-स्व.किशोरी लाल श्रीवास्तव है।15-16 वर्ष की उम्र मे ही उन्हें किशोर दा की आवाज का जादू सर इस कदर चढ़ा की अजय की एक अलग ही पहचान बन गयी।आदतन वे लाचार व विवश थे कि हर पल,सोते-जागते उठते-बैठते ,सुख-दुख व हर वक्त किशोर कुमार के हीं गीत गुनगुनाते रहते।
नहीं चाहते थे, घर वाले
अजय की मानें तो इनके घर-परिवार को प्रारम्भ से ही संगीत में रुचि न था।यहां तक कि उनके माता-पिता ने कभी प्रोत्साहित करना तो दूर गीतों को गुनगुनाते भी कोई पसंद नही करता था।
टूटता गया दिल,ढूंढता गया मंजिल
अजय ने घर-परिवार की बातें बताने से हिचकते नहीं।बताते हैं कि मेरे लिए संगीत क्षेत्र मे किसी ने मदद नहीं कि,फिर भी मंजिल तक पहुंचने के लिए किशोर कुमार को अप्रत्यक्ष रूप से गुप्त गुरू मानकर गायन विद्या जारी रखा।
मंच ने ला दिया जीवन व गायन में रंग
उनकी जीवन की प्रथम पहचान के रूप में सन 1990 का रंगमंच था,जिस मंच ने उनकी जीवन व सुरीले आवाज में एक अलग व गहरा रंग ला दिया। मुकेश,रफी,हेमंत कुमार,अमित कुमार,कुमार शानू,अभिजीत,बिनोद राठौड़ के गीत आसानी से गाने की क्षमता बढ़ गयी।किशोर कुमार को उन्होंने अपने गुरु के रूप में देखा था।उनके द्वारा गाए गीतों में सीखने को कई शब्द,गुण आदि मिले।
अजय के कुशल गायन शैली को लोग अब “गाॅड गिफ्ट ऑफ स्वीट वॉइस” बोलते हैं।
उन्होंने इस प्रसिद्धि का श्रेय अपने बड़े भाई प्रमोद को देते हैं,जिनकी मदद से इन्हें एक बड़ी व चर्चित पहचान मिली।कहते हैं कि एक समय था,जब मुझे कोई मदद नहीं करता था, अब युवाओं को भी संगीत क्षेत्र में बढ़ने का देते हैं मौका।अजय अब जूनियर किशोर कुमार के नाम से जाने जाते हैं।हु-बहु गीत,हु-बहु सुरीली आवाज। कोई भी उनकी गीतों से आकर्षित व मंत्र मुग्ध हो जाएगा।

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