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शराब फैक्ट्री में नाबालिक लड़कीयों का शोषण

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न्यूज टुडे

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फ्लॉप साबित हो रहा सरकार का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान

शराब फैक्ट्रियां उठा रही मजबूर लड़कियों का फायदा

बोकारो। एक तरफ केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है। वहीं दूसरी ओर जिन हाथों में कलम-किताबें होनी चाहिए थी, उन हाथों को मजबूरियों ने शराब की बोतलें थमा दी। सरकार के तमाम दावे व कोशिशें न केवल खोखला साबित होता दिख रही है, बल्कि सरकार भी कठघरे में खड़ा हो गयी है। वैसे मजबूर लड़कियों का फायदा बोकारो के शराब फैक्टरियां उठा रही है।

सराब फैक्ट्री में काम करती महिलाएं।

श्री ओम बॉटलिंग एंड ब्लेंडर (प्राइवेट) लिमिटेड में हैं 70 प्रतिशत मजदूर महिलाएं

बालीडीह के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित  श्री ओम बॉटलिंग एंड ब्लेंडर (प्राइवेट) लिमिटेड कम्पनी नामक बॉटलिंग फैक्टरी में कार्यरत मजदूरों में 70 प्रतिशत सर्वाधिक महिला मजदूर है, जिनमें पढ़ने वाली लड़कियां भी है। सबसे आश्चर्य कि बात है कि शराब की फैक्टरी में लड़कियां मजदूर है। बिहार समेत कई प्रान्तों में शराबबंदी नियम लागू है। शराब व नशा मुक्ति अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इस धंधे में महिलाओं तथा लड़कियों को धकेलना कितना जायज है।

विभिन्‍न विद्यालयों की छात्राएं भी है शामिल

बॉटलिंग प्लांट में कई स्कूलों की छात्राएं भी शामिल है, जो पार्ट टाइम जॉब करती है। इसके एवज में उन्हें 140  रुपये मिलते हैं। जो परिवार चलाने एवं व्‍यक्तिगत खर्च में सहायक होता है।प्रशासन को नहीं दिखी छात्राओं व महिलाओं की मजबूरी सरकार के प्रायोजित योजनाओं को अमलीजामा पहनाने वाले प्रशासनिक अधिकारी इससे बेखबर हैं। शराब  व्‍यवसाय में लड़कियों की सहभागिता कितना जायज है, खुद सोच सकते हैं। मगर यहां निरीक्षण करने पहुंचे एसडीओ समेत कई अधिकारियों ने शराब फैक्‍ट्री में महिलाओं व छात्राओं के काम करने के मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। शराब का हिसाब मिलाने में ही व्‍यस्‍त रहे। इन्‍हें इन मजबूर बच्चियों व महिलाओं की जरा सी भी चिंता नहीं हुई। इस मुद़्दे पर जब एसडीओ से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गयी तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

उड़ायी जा रही नियमावली की धज्जियां!

शराब निर्माण, उसके पैकिंग के लिए जो मानक तय किया गया है, उसकी धज्जियां उड़ाई जा रही है। इस धंधे में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियां भी शामिल है, जो अपनी जिंदगी जीने के लिए इस खतरनाक काम को कर रहीं है। इस काम से उनके जान को भी खतरा है। कुछ लड़कियों ने रटी रटाई भाषा तो बोली, लेकिन यह भी बताया कि वह नौंवी कक्षा की छात्रा है।

शराब के व्यपार के लिए नाबालिक का शोषण।

यहां काम करने वाली अधिकतर बच्चियां 18 वर्ष से कम उम्र की है।

सराब फैक्ट्री में नाबालिक लड़कियां।

यहां ये सभी निर्धारित समय पर काम करने के लिए आ जाती हैं। इस दौरान इनके साथ कोई अनहोनी नहीं हो इसकी संभावना बहुत कम ही नजर आती है।

यहां काम लेने वाले सभी अधेड़ हैं, जो इनसे काम लिया करते हैं। यहां काम लेने वाले का तर्क ये है कि महिलाएं और लड़कियां अपने काम के प्रति सजग है। पुरुषों की तरह काम चोर नहीं है। इस कारण इनसे काम लिया जाता है।

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