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शिक्षा को लेकर प्रारम्भ से ही असंवेदनशील रघुवर सरकारः योगेन्द्र प्रताप

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रांची।

शिक्षा को लेकर प्रारम्भ से ही असंवेदनशील रघुवर सरकारः योगेन्द्र प्रताप

रांची। झाविमो के केन्द्रीय प्रवक्ता योगेन्द्र प्रताप ने कहा है कि रघुवर सरकार पारा शिक्षकों के साथ दोहरा अन्याय कर रही है। एक तो पारा शिक्षकों को पहले ही समान काम समान वेतन के लाभ से वंचित रखा गया है और ऊपर से दूसरा पांच माह से उनका मानदेय भी लंबित है। सच्चाई है कि राज्य में पारा शिक्षकों की बदौलत ही अधिकांश स्कूलों का ताला खुलता है और शिक्षा का दीप जल पाता है बावजूद सरकार का यह रवैया समझ से परे और अत्याचार सरीखा है। दरअसल भाजपा सरकार शिक्षा को लेकर प्रारम्भ से ही असंवेदनशील है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण राज्य में रघुवर सरकार द्वारा 12,500 स्कूलों का विलय करना है। यह सरकार पूरी तरह निर्दयी व बेरहम है। झाविमो राज्य सरकार से पारा शिक्षकों व अन्य तमाम अनुबंधकर्मियों के साथ बंधुआ मजदूर जैसा बर्ताव करना बंद करने और उचित सम्मान के साथ उचित वेतन सससम इन्हें सुनिश्चित करने की मांग करती है।

वैसे भी इस सरकार की मियाद अब पूरी हो चुकी है, यह चंद दिनों की मेहमान है।  एक और दूसरा उदाहरण पारा शिक्षकों व शराबकर्मियों के वेतन में विसंगतियां है। शराबकर्मियों को लगभग 25000 और पारा शिक्षकों को 8000 रूपया प्रतिमाह भुगतान कर सरकार स्पष्ट कर रही है कि उसकी प्राथमिकता क्या है। हड़ताल अवधि के दौरान आर्थिक अभाव व अन्य कारणों से दर्जनों पारा शिक्षकों की मौत से भी सरकार का दिल नहीं पसीजना दुखद है।

कोई भी जनहित वाली सरकार शिक्षा को और सहज बनाने की दिशा में प्रयास करते हुए स्कूलों की संख्या बढ़ाती है परन्तु रघुवर सरकार देश की ऐसी पहली सरकार है जो स्कूलों को बंद कर पूरी शिक्षा व्यवस्था को ही बेपटरी करने पर आमादा है।

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