शारदीय नवरात्र के मौके पर हो रहे प्रवचन कथा में भगवान शिव के विवाह की कथा को संगीतमय सुनाया गया।

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गढ़वा।

शारदीय नवरात्र के मौके पर हो रहे प्रवचन कथा में भगवान शिव के विवाह की कथा को संगीतमय सुनाया गया।

(संवाददाता-विवेक चौबे)
गढ़वा : जिले के हरिहरपुर में भाष्कर युवा क्लब द्वारा शारदीय नवरात्र के मौके पर हो रहे प्रवचन कथा में नवरात्र के तीसरे दिन भगवान शिव के विवाह की कथा को संगीतमय सुनाया गया। उद्धव दास “मानस किंकर” ने कहा कि भगवान की कथा सुनने से हमारा जीवन सफल हो जाता है।हमारा मानव रूपी शरीर अपने अँगूल से 84 अँगूल का होता है।हम अपने मानव जीवन मे जितना दान करेंगे, जितना दुसरो की भलाई करेंगे हमारा भी उतना ही भलाई होगा।समाज की वर्तमान स्थिति पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि आज जब लडकिया मायके से ससुराल में दुल्हन बन कर आती है तो केवल अपने मायके के ही गुणगान में लगी रहती चाहे ससुराल का कुछ भी हो जाये।शिव विवाह की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गोरी जी के लिए शंकर भगवान को दूल्हा देख कर उमकी माता मैनावती साफ मना किया कि हमे ऐसे पागल दूल्हा अपनी पुत्री के लिए नही चाहिए।शिव जी के बारात में ऐसे लोग बारात गये थे जिन्हें देख कर वंहा के लोग बेहोश होकर गिर जाते थे,शिव जी के गले का सर्प जिस समय फुफकार मरता है उस समय रानी मैनावती डर जाती है। भगवान शंकर के विवाह में सबसे ज्यादा लोगो को आश्चर्य तब हुआ जब गोत्राचार के लिए उनके वंसज का नाम पूछा गया ,तब भगवान शंकर ने भगवान विष्णु का नाम अपने पिता के रूप में लिया और विष्णु उस समय भसुर बनकर मंडप में बैठे थे।

उन्होंने लड़िकयों के विदाई पर कहा कि मायके तभी तक अच्छा होता है जूब तक मायके में माँ,पिता ,भाई,भोजाई रहे नही तो उसके बाद मायके का कोई अर्थ नही रहता।दास जी यह कहते हुए भाउक हो जाते है कि बेटियां आंख के पुतली के समान होती है बेटियां ससुराल जो उनका अपना घर होता है वंहा जाकर भी अपने भाई को नही भूलती और उनका बुराई भी नही सहन कर पाती है।इस संसार मे भी बहन का प्रेम अमर होता है। प्रवचन कार्यक्रम में क्लब के अध्यक्ष अरुण मिश्रा,मंच संचालक-सत्राजित मिश्रा , राम लखन चौबे,मृत्युंजय चौबे,बुद्धिनारायन साह,कुंदन चौबे,कमिटी के सभी सदस्य व सैकड़ो भक्तगण उपस्थित थे।NEWSTODAYJHARKHAND.COM

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