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वसुंधरा होटल में युवक का फंदे से लटका मिला शव

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न्यूज टुडे



धनबाद।

अपने दोस्त और उसके बीबी को अपनी गाढ़ी कमाई उधार के रूप में दिया, जब दोस्त ने कहा की तुम जीते जी पैसा नहीं ले पाओगे तो अपने पैसे को डूबता देख वह इतना हताश हुआ की उसने उसके कहने पर ही अपनी जान दे दी.

वाक्या धनबाद का है जंहा चर्चित वसुंधरा होटल के कर्मी आशीष मोदक ने होटल में ही फांसी लगाकर अपनी जान दे दी. अपनी जान देने से पहले उसने एक सुसाइड नोट भी लिखा जिसमे उसने अपने दोस्त दिनेश और उसकी पत्नी कौशल्या देवी को पैसे देने का जिक्र ही नहीं बल्कि पूरी कहानी बयान की.

आशीष के दोस्त ने बताया की वह होटल में कुक का काम करता था और रात को अकेले ही एक कमरे, में सोने गया था. सुबह जाब काफी देर चिल्लने के बाद भी दरवाजा नहीं खोला तो उसने होटल के अधिकारी को इसकी सुचना दी.

इसके बाद किसी तरह दरवाजा खोला गया तो अन्दर का दृश्य काफी दर्दनाक था. आशीष गमछे के सहारे फंदे से झूल रहा था. फौरन पुलिस को इस घटना की सुचना दी गयी. पुलिस मौके पर पंहुची और शव को उतारकर पंचनामा कर उसके सहकर्मियों से जानकारी ली और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

दोस्त से भरोसा टूटा तो जान देने की सोची।

आशीष अपने दोस्त दिनेश पर काफी भरोषा करता था. उसने उसके भरोसे पर अपने घर से छिपाकर लगभग पचास हजार रूपये उसे दिए थे. लेकिन जब वापस देने की बारी आई तो दिनेश ने यह कहते हुए साफ़ इनकार कर दिया की उसने किसी के सामने पैसे नहीं दिए है उसके पास कोई प्रूफ नहीं है.

सुसाइड नोट में बताया गया है की उसने दिनेश से कहा था की हम मर के भी पैसा तुमसे लेंगे. उसने लिखा की उसने पैसे अपने घरवालो से छुपा के दिए थे. भरोसा इतना था की उसका नंबर भी उसके पास नहीं रखते थे.

उसने लिखा की क्योकि दिनेश ने बोला था की हमको किसी के सामने पैसा नहीं देना और अपना घर में भी नहीं बताना. उसने यह भी बताया है की उसके घरवाले उसे दिनेश के घर जाने से रोकते थे और उसकी बीबी से भी ज्यादा दोस्ती करने से रोकते थे.

सुसाइड नोट में प्रशासन से कहा माँ बाबूजी को दिला देना पैसा।

अपने सुसाइड नोट में आशीष ने प्रशासन, धनबाद के जनता, एके सहाय मुखिया पर भरोषा जताते हुए कहा है की सारा पैसा मेरे मरने के बाद मेरे माँ बाबूजी को दिलाने में मदद करंगे उन्हें भरोषा है. उसने लिखा की मैसे सोचा की ज़िंदा रहता तो पुलिस नहीं सुनता लेकिन मर जाता है तो सब विश्वास करता है इसलिए मैंने सोचा की हम मरकर भी दिनेश से पैसा लेंगे तो लेंगे.

उसने यह भी कहा है की सारी बात पेपर में भी छपवाना, क्योनी ऐसा गलती कोई नहीं करे और माँ बाबूजी को कोई झूठ नहीं बोले. क्योंकि पैसा छुपाने के लिए हम बहुत झूठ बोले और जो झूठ बोलता है नरक में जाता है।

उसने सीधे सीधे दिनेश रवानी और उसकी बीबी कौसल्या देवी को अपनी मौत का जिम्मेवार ठहराया है.

बकायदारो से माफ़ी मांगी कहा दिनेश और उसकी बीबी को मत छोड़ना।

सुसाइड नोट में आशीष ने बताया है कि केबल रजक से उसने 20 हजार, हीरालाल महतो से 30 हजार ब्याज पर लेकर उसने दिनेश को दिया था शिव शक्ति में पपू से उसने 12 से 13 हजार लिए थे.

उसने सभी बकायदारो से माफ़ी मांगते हुए कहा की तुम सब का पैसा मैंने गलत जगह दे दिया इसलिए जीने का मन नहीं करता है, हमने बहुत गलत किया. तुम सब मेरे घरवालो का साथ देकर दिनेश और उसकी बीबी को नहीं छोड़ना. फिर उसने किसी सही जी से भी अपने घरवालो के मदद की प्रार्थना की है।

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