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लॉकडाउन से बेरोजगार गोड्डा के 3 मजदूर साइकिल ले निकले अपने गांव

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लॉकडाउन से बेरोजगार गोड्डा के 3 मजदूर साइकिल ले निकले अपने गांव

NEWS TODAY गोमिया–   कोविड-19 के संक्रमण से बचाव के लिए सरकार ने लॉकडाउन 4.0 लागू कर दिया है। प्रदेश में गुजर बसर कर रहे मजदूर पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। ये जहां थे, वहीं फंस गए हैं। सरकार की अपील के बाद भी फैक्ट्री, दुकान व मकान मालिक मजदूरों सरन देने के बजाय अपने हाथ खड़े कर उनको घर भेज रहे हैं। मंगलवार को रांची के कट्ठल मोड़ से 3 मजदूर साइकिल चलाकर लौट रहे गोड्डा के प्रवासी मजदूर देर शाम गोमिया बैंक मोड़ पहुंचे। आपबीती बताते हुए गोड्डा के पिपरा गांव के मजदुर भावुक हो गए। मजदूरों ने बताया कि इस लॉक डाउन में उनके पास घर लौटने के लिए फिलहाल कोई साधन नहीं है क्योंकि ट्रेन और बस सहित अन्य यातायात सेवाएं बंद हैं।
मजदूरों ने बताया कि वे सभी रांची के कट्ठल में राजमिस्त्री के रूप में कार्यरत थे। जब से लॉकडाउन लगी है कंस्ट्रक्शन मालिकों ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए और अपने घर लौट जाने को कहा। लॉकडाउन में सब कुछ बंद हो जाने से हमारे समक्ष मुखों मरने की स्थिति उत्पन्न हो गयी। अंततः मजदूरों ने 26 मई की सुबह को साइकिल से निकलने की योजना बनाई। मजदूरों ने अपनी पीड़ा बताकर अगक बगल के लोगों से तीन पुरानी साईकिलों की खरीदारी की और अपनी साइकिल से ही अपने गांव की ओर निकल पड़े।

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रांची से गोड्डा इनका पिपरा गांव करीब 360 किलोमीटर है। मजदूर रुदन महतो, राजेश यादव व सुनील महतो ने बताया कि इस दौरान उन्हें खाने-पीने, सोने और आराम करने में काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा। ये सभी कहीं पान की गुमटियों से कभी पान तो कभी चॉकलेट, बिस्कुट का सहारा लेकर बदस्तूर चल रहे हैं। गोमिया बैंक मोड़ पहुंचने पर सामाजिक लोगों ने इन्हें खाने पीने की राहत सामग्री प्रदान की और यहीं रात गुजारने की बात कही। गोमिया टॉप केयर के मददगार टीम के प्रणेता डॉ. निजाम ने उक्त तीनों मजदूरों के लिए रात्रि भोजन की व्यवस्था कराई।

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