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राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की नीति। पढ़ें पूरी खबर……

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नई दिल्ली।

राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की नीति। पढ़ें पूरी खबर……

(मनोरम भारती)
कांग्रेस पार्टी के सभी नेता इस प्रयास में लगे हैं कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को इस बार कैसे भी देश का प्रधानमंत्री बनवा दिया जाए।Image result for राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की नीति।ईसके लिये सभी नेता पूरा प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी चाहती है कि राहुल गांधी देश का प्रधानमंत्री बनकर अपने पूर्वजो की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाये। राहुल गांधी के सामानान्तर सत्ता का दूसरा केन्द्र ना बने इस लिये प्रियंका गांधी को भी सक्रिय राजनीति से दूर रखा जा रहा था। मगर अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिये कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को भी सक्रिय राजनीति में उतार कर कांग्रेस का महासचिव बना दिया।

अब कांग्रेस में राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष व प्रियंका गांधी महासचिव है जिनका पूरी पार्टी पर नियंत्रण हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी की हवा में कांग्रेस मात्र 44 सीटो तक ही सिमट कर रह गयी थी जो कांग्रेस को अब तक की सबसे कम सीट मिली थी। देश के आधे प्रदेशो में तो कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल पाया था। देश के कुछ प्रदेशों में ही कांग्रेस की सरकार रह गयी है। ऐसे में 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की पूरी राजनीतिक प्रतिष्ठा ही दाव पर लगी है। कांग्रेस का पूरा प्रयास है कि कैसे भी उसके नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में देश की अगली सरकार बने।

ताकि उनके खिसकते वोट बैंक को बचाया जा सके। लेकिन चुनाव से पूर्व कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की नीति से चूक गयी लगती है।Related image कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, आन्ध्र प्रदेश, तेलंगाना, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, जम्मू कश्मीर, ओडीसा, असम जैसे प्रदेशो में किसी अन्य क्षेत्रीय दलो से समझौता करने में असफल रही। इन प्रदेशो से लोकसभा की कुल 235 सीटे आती है। अब अकेले अपने दम पर कांग्रेस इन प्रदेशों में दो दर्जन सीटे भी जीतने की स्थिति में नहीं हैं।

कांग्रेस वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की चार, उत्तराखण्ड की पांच, पंजाब की तेरह, दिल्ली की सात, राजस्थान की पच्चीस, गुजरात की छब्बीस, मध्यप्रदेश की उन्तीस, छत्तीसगढ़ की ग्यारह, गोवा की दो, महाराष्ट्र की पच्चीस, कर्नाटक की बीस, केरल की पन्द्रह, बिहार की नौ, झारखण्ड की छ:, पूर्वात्तर की पन्द्रह, उत्तर प्रदेश की दो सीटो पर ही सीधे मुकाबले में हैं।

इस तरह देखें तो कांग्रेस देश भर में मात्र 214 सीटो पर सीधे मुकाबले में है बाकी अन्य सीटो पर वह भाजपा व क्षेत्रीय दलो के साथ तिकोणे मुकाबले में फंसी हुयी है जहां उसके लिये सम्भावना बहुत कम मानी जा रही है।
देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तरप्रदेश से अकेले लोकसभा की 80 सीट आती है मगर वहां सपा बसपा गठबंधन ने कांग्रेस के लिये महज दो सीट छोड़ी है वो भी सोनिया गांधी की रायबरेली व राहुल गांधी की अमेठी। बाकी सभी 78 सीटो पर उसे भाजपा के साथ सपा बसपा गठबंधन से भी टक्कर लेनी होगी।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सामने प्रियंका गाधी के चुनाव लडऩे की काफी चर्चा रही मगर अन्तिम समय में प्रियंका गांधी के मोदी के सामने सम्भावित हार के डर से मैदान छोड़ देने से प्रियंका गांधी व कांग्रेस की राजनीतिक हल्को में खासी किरकिरी हुयी है।Image result for राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने की नीति। जिसका असर उत्तर प्रदेश की अन्य सीटो पर भी पड़ेगा। शुरू में तो प्रियंका गांधी मोदी के सामने चुनाव लडऩे के संकेत देती रही मगर मोदी के नामांकन से पूर्व रोड़ शो देखकर कांग्रेस ने 2014 में जमानत जब्त करवा चुके अजयराय को ही एक बार फिर प्रत्याशी घोषित कर मोदी को वाक ओवर दे दिया।

दिसम्बर 2018 में कांग्रेस ने राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ में भाजपा को हरा कर अपनी सरकार बनायी है। वहां कांग्रेस को काफी अधिक सीटे मिलनी चाहिये मगर उन प्रदेशो से जिस प्रकार की खबरे आ रही है वो कांग्रेस के लिये अच्छी नहीं मानी जा सकती है। Image result for congress2014 के लोकसभा चुनाव के समय पूर्वोत्तर के अधिकांश प्रदेशों में कांग्रेस की सरकार थी आज स्थिति एकदम उलट है। पूर्वोत्तर के सभी आठ प्रदेशों से कांग्रेस का सफाया हो चुका है। वहां अब भाजपा व उसके गठबंधन वाली क्षेत्रीय दलों की सरकारे कार्यरत है।
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कुछ दिनो पूर्व एक बयान दिया था कि उत्तर प्रदेश में हमारी पार्टी के प्रत्याशियों की स्थिति जीतने वाली नहीं हैं।

हम तो भाजपा के वोट काटने के लिये चुनाव लड़ रहें हैं ताकि विपक्षी दलों को वोट कटने का लाभ मिल सकें। प्रियंका गांधी के इस बयान से कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों का मनोबल कमजोर हुआ है। प्रियंका गांधी के बयान को लोग मजाक के रूप में लेने लगे हैं।
कांग्रस के सबसे बड़े हिमायती माने जाने वाले शरद पवार ने हाल ही बयान जारी कर कहा है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं। उनकी नजर में ममता बनर्जी, चन्द्रबाबू नायडू, मायावती में प्रधानमंत्री बनने के गुण है। पवार के बयान से राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की दावेदारी कमजोर हुयी है। वैसे भी लालू यादव, देवेगौड़ा, स्टालिन व वामपंथी दलो के अलावा अन्य किसी दल का नेता राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

लोकसभा चुनाव के बाद भी कांग्रेस की स्थिति में कोई खास सुधार होता नजर नहीं आ रहा है। कांग्रेस की कुछ सीटे बढ़ सकती है मगर उनकी संख्या इतनी नहीं होगी जिनके बल पर उनको प्रधानमंत्री बनाया जा सके।
कांग्रेस के नेता एक बार फिर 2004 वाली स्थिति दोहरा कर केन्द्र में कांग्रेस के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनाना चाहते हैं मगर आज केन्द्र में भाजपा के पास नरेन्द्र मोदी जैसा जनाधार वाला मजबूत नेता है जिसको पराजित कर पाना राहुल गांधी के वश में नहीं है। बिहार, झारखण्ड, तमिलनाडू जैसे प्रदेशो में तो कांग्रेस की स्थिति आज पिछलग्गू जैसी बन कर रह गयी है।

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