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राज्य के जनजातीय बहुल 10 जिलों में चलेगी क्षमता परियोजना

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रांची।

राज्य के जनजातीय बहुल 10 जिलों में चलेगी क्षमता परियोजना

रांची। राज्य के जनजातीय बहुल 10 जिलों में मधुमक्खी पालन, मुर्गी पालन और बकरी पालन को प्रोत्साहित कर किसानों की आय बढाने के उद्देश्य से आइसीएआर द्वारा जनजातीय उप योजना के तहत 7.53 करोड़ रूपये की क्षमता परियोजना बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को स्वीकृत की गयी है ।

यह परियोजना पाकुड़, साहिबगंज, दुमका, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रांची, लोहरदगा, लातेहार, सिमडेगा और गढ़वा में कृषि विज्ञान केन्द्रों (केवीकी) के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी ।
मधुमक्खी पालन के लिए 10 जिले से 60-60 किसान यानी कुल 600 किसान चुने जायेंगे, जबकि मुर्गीपालन और बकरीपालन के लिए प्रत्येक जनजातीय बहुल जिले के चार-चार गांवों से 25 पशुपालक, यानी कुल 1000 किसान चुने जायेंगे।

मधुमक्खीपालकों द्वारा उत्पादित मधु के एक्सट्रैक्शन और प्रोसेसिंग के लिए प्रत्येक केवीके में एक एक्सट्रैक्शन संयंत्र भी स्थापित किया जायेगा ।
सम्बंधित केवीके वैज्ञानिकों के तकनीकी सु.ढीकरण के लिए बीएयू में शुक्रवार (22 मार्च)को एक कार्यशाला आयोजित की गयी ।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने कहा कि केवीके वैज्ञानिक सुनिश्चित करें कि परियोजना का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और परिणामों का सही प्रलेखन हो ।लाभग्राहियों का चयन वैज्ञानिक करेंगे और सुचारू कार्यान्वन एवं रिपोर्टिंग के लिए केवीके के प्रमुख जिम्मेदार होंगे।यदि केवीके में सम्बंधित विशेषज्ञ नहीं हैं तो केवीके प्रमुख सम्बंधित विभागाध्यक्ष से संपर्क करें ।परियोजना के अंतर्गत चयनित किसानों को केवल परामर्श और प्रशिक्षण देकर नहीं छोड़ देना है, बल्कि सालो भर उनका मार्गदर्शन करना है, परिणाम की समीक्षा करनी है तथा परयोजना समाप्ति के बाद भी किसान सम्बंधित गतिविधि में संलग्न रहे, यह देखना है प् परियोजना कार्यान्वित करनेवाले केवीके कुछ कृषि यंत्र भी रखेंगे, जिन्हें अल्प किराये पर किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा ।

निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ आर एस कुरील ने कहा कि यह परियोजना किसानों की आय दुगुनी करने में काफी सहायक होगी प् इसके लिए वैज्ञानिकों को टीम भावना से काम करना होगा ।उद्घाटन सत्र में निदेशक अनुसन्धान डॉ डीएन सिंह तथा डॉ बीके राय ने भी अपने विचार व्यक्त किये ।
डॉ एमके चक्रवर्ती ने मधुमक्खीपालन, डॉ सुशील प्रसाद ने पशुपालन एवं मुर्गीपालन, डॉ स्वाति शबनम ने किसानों की आय दुगुनी करने, डॉ सीएस सिंह ने प्राकृतिक कृषि, डॉ ए वदूद ने स्वच्छ पर्यावरण, डॉ एमएस मालिक ने कृषि-वानिकी, डॉ उत्तम कुमार ने कृषि मशीनरी, डॉ एस कर्मकार ने जैविक खेती तथा डॉ एके सिंह ने मत्स्यपालन के तकनीकी पहलुओं से केवीके वैज्ञानिकों को अवगत कराया ।

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