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योग सिखने के लिए गोल्फ ग्राउंड में उमड़ रही लोगों की भीड़

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धनबाद।

योग सिखने के लिए गोल्फ ग्राउंड में उमड़ रही लोगों की भीड़

धनबाद। गोल्फ ग्राउंड में बिहार योग विद्यालय मुंगेर के तत्वावधान में तीन दिवसीय योगोत्सव चल रहा है। योगोत्सव के प्रथम दिन योग का शारीरिक, मानसिक व आध्यात्मिक पक्ष का ज्ञान बांटा गया। सुबह के सत्र में योगासन और शाम के सत्र में योग निंद्रा का अभ्यास कराया गया। योग का मतलब अपने को जानना होता है। योग पेट पालने की कला नहीं बल्कि यह स्वयं के आत्मा का दर्शन है। आसन व प्राणायाम संपूर्ण योग नहीं हैं। ये योग के छोटे से हिस्से हैं। इससे दोस्ती करना है, इसकी रखवाली करना है और इसी में विलीन हो जाना है। यही योग का सही अर्थ है। योग से जुड़ी ये बातें स्थानीय गोल्फ ग्राउंड में आयोजित योगोत्सव सह भारत योग यात्रा के दौरान स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने योग करने वाले लोगों को संबोधित करते हुए कही।

मुंगेर योगाश्रम से पहुंचे स्वामी शिवराजानंद सरस्वती और स्वामी केवल्यानंद सरस्वती लोगों को कई तरह के आसन सहित अनेकों प्राणायाम सिखाये। जोड़ों का दर्द खत्म करने में सहायक पवन मुक्तासन का अभ्यास लोगों को कराया गया। यह शरीर को लचीला बनाने और जोड़ों का दर्द खत्म करने में सहायक है। स्वामी शिवराजानंद सरस्वती ने कहा कि इस आसन को करने से जोड़ों का दर्द नहीं होगा। वहीं ताड़ासन, त्रिचक्र ताड़ासन व कटिचक्र आसन करने से कब्ज नहीं होता है। शाम के सत्र में स्वामी केवल्यानंद सरस्वती ने योगोत्सव में पहुंचे लोगों को योग का दर्शन कराया।

उन्होंने सेवा, प्रेम व दान का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में अच्छे कर्म करें। अच्छे कर्म करने से आप अच्छा बनेंगे। मन में अच्छे विचार आएंगे तभी शरीर शुद्ध होगा और आप सच्चाई के मार्ग पर चलेंगे। स्वामी शिवराजानंद ने बताया कि वर्ष 2014 में भारत योग यात्रा आरंभ हुई। सबसे पहले गुजरात में योगोत्सव किए। इसका उद्देश्य योग के मूल उद्देश्य से लोगों को अवगत कराना है। कुछ लोग योग को भ्रमित कर रहे हैं। इसे व्यापार बना चुके हैं जो कि योग का अपमान है।

योगोत्सव में धनबाद के लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं तथा आसन और प्राणायाम सिख रहे हैं।

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