• झारखंड का उभरता न्यूज़ पोट्रल न्यूज़ टुडे झारखंड में आप के गली मोहलले के हर खबर अब आप के मोबाइल तक आप के गली मोहल्ले की हर खबर को हम दिखाएंगे प्रमुखता से हमारे न्यूज़ टुडे झारखंड के संवादाता से संपर्क करे,ph..No धनबाद, 9386192053,9431143077,93 34 224969,बोकारो,+91 87899 12448,लातेहार,+919546246848,पटना,+919430205923,गया,9939498773,रांची,+919334224969,हेड ऑफिस दिल्ली,+919212191644,आप हमें ईमेल पर भी संपर्क कर सकते है हमारा ईमेल है,NEWSTODAYJHARKHAND@GMAIL........झारखंड के हर कोने कोने की खबर अब आप के मोबाइल तक सबसे पहले आप प्ले सटोर पर भी न्यूज़ टुडे झारखंड के ऐप को इंस्टॉल कर सकते है हर तरह के वीडियो देखने के लिए सब्सक्राइब करे यूट्यूब पर NEWSTODAYJHARKHAND......विज्ञापन के लिए संपर्क करे...9386192053.9431134077

मतदाताओं की ईमानदारी!

1 min read

लेख डेस्क।

मतदाताओं की ईमानदारी!

(लेखक-डॉ हिदायत अहमद)
देश में आतंकी हमले के बाद पड़ोसी मुल्क से तनाव के चलते कयास लगाए जा रहे थे कि लोकसभा चुनाव 2019 करीब दो माह आगे बढ़ सकते हैं। Image result for अब मतदाताओं से है चुनाव में ईमानदार पूर्ण भागीदारी की दरकारइस बात को यूं भी बल मिल रहा था क्योंकि देश में राजनीतिक सर्वे रिपोर्ट लगातार यह बतला रहीं थीं कि बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता घट गई है, जिसका नुकसान इस चुनाव में भाजपा व एनडीए को उठाना पड़ सकता है। सभी मतदाता बिना भय के अपने मताधिकार का प्रयोग तय समय पर कर सकेंगे। जहां तक चुनाव में होने वाली गड़बड़ियों का सवाल है तो इस पर चुनाव आयोग अपने स्तर पर नजर रखेगा, लेकिन इससे हटकर मतदाता का भी दायित्व बनता है कि वह तय करे कि बिना किसी लोभ, लालच, डर या भय के मताधिकार का प्रयोग करे और एक ऐसी सरकार चुनने में मददगार साबित हो जिससे देशहित सधता हो। इसके अलावा उम्मीदवारों द्वारा और पार्टी स्तर पर किए जाने वाले चुनाव खर्चे पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।

गौरतलब है कि पैसा फेककर चुनाव जीतने की एक परंपरा देश में काफी लंबे समय से चली आ रही है, जिस कारण अच्छे और साफ-सुथरी छवि वाले उम्मीदवार अपने आपको साबित करने में असफल हो जाते हैं। पैसे के दम पर चुनाव जीतने वाली परिपाटी को रोकने की खातिर चुनाव आयोग लगातार सख्ती बरतता रहा है, लेकिन चुनाव में जीत हासिल करने की गरज से राजनीतिज्ञ ऐसा कोई न कोई रास्ता खोज ही लेते हैं जिसके जरिए वो वोट बैंक को अपने कब्जे में कर चुनाव जीतने का दम भरते भी नजर आ जाते हैं। आमचुनाव की तारीखें घोषित होने के साथ ही चुनाव आचार संहिता भी लागू हो गई है। इसके चलते अब सरकारें कोई नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगी। Related imageबहरहाल चुनाव आगे बढ़ने के कयासों को पूर्ण विराम लगाते हुए चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तिथियों की घोषणा कर बतला दिया कि इस बार 7 चरणों में चुनाव संपन्न कराए जाएंगे और परिणाम 23 मई को आएंगे। मौजूदा लोकसभा का कार्यकाल 3 जून को खत्म हो रहा है। इसलिए चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में ही संपन्न होने की संभावना व्यक्त की जा सकती है।

चुनावी सभाओं के जरिए जरुर लोकलुभावन घोषणाएं की जाएंगी और मतदाताओं को लुभाने के प्रयास भी आम हो जाएंगे। बहरहाल मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने चुनाव तिथियों की घोषणा करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव घोषित करने से पहले सभी एजेंसियों से राय ले ली गई और कानून व्यवस्था पर भी पूर्ण रुपेण विचार किया गया है।

चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों व उम्मीदवारों या उनके नाते-रिश्तेदारों द्वारा जनता में पैसा और वस्तु बांटा जाना और अन्य लाभ देने के साथ ही नशे का सामान अर्थात् सुर, सुरा और सुंदरी पहुंचाने का काम बहुतायत में होता आया है। Related imageइस पर जब तक पूर्ण रुपेण रोक नहीं लग जाती तब तक साफ-सुथरी छवि वाले लोगों का संसद में पहुंचना मुश्किल ही है। इसके लिए जरुरी है कि चुनाव आयोग और पुलिस प्रशासन समेत अन्य एजेंसियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समाजसेवी संगठन और जगारुक मतदाता भी चलने की कोशिश करें, क्योंकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को पूरी ईमानदारी से पूर्ण कराने की जिम्मेदारी महज चुनाव आयोग की नहीं बल्कि देश के असली मालिकों यानि आमजन की भी है। इसके लिए जरुरी हो जाता है कि ऐसे लोग जो मतों के बदले लालच देते हैं या उन्हें खरीदने की कोशिश करते हैं या फिर डरा-धमकाकर अपने पक्ष में वोट डलवाना चाहते हैं उनका खुलकर विरोध किया जाए और Related imageउनके चेहरों पर पड़ा राजनीतिक नकाब उतार फेंका जाए, क्योंकि ये वो लोग होते हैं जो चुनने से पहले तो अपने कालेधन से आपको खरीदने की कोशिश करते हैं, लेकिन जीत जाने के बाद आपसे दमड़ी और चमड़ी दोनों छीन लेते हैं। इनसे सिर्फ और सिर्फ स्वयं का हित ही सध सकता है, जबकि मतदाता को चाहिए कि वो अपने क्षेत्र और देश के हित के लिए जनप्रतिनिधि चुने। ऐसा करने से संभव है कि अपराधियों का जहां राजनीति से मोह भंग होगा वहीं दूसरी तरफ गैरकानूनी साधनों का उपयोग कर चुनावी फसल काटने वाले भी सही रास्ते पर चलते नजर आ जाएं।  यह आमचुनाव राजनीतिक पार्टियों और उम्मीदवारों की परीक्षा मात्र नहीं है बल्कि मतदाताओं के लिए भी इम्तेहान की घड़ी है। एक ऐसा इम्तिहान जिसमें सफलता हासिल तभी हो सकती है जबकि आप देश को एक कामकाजी और ईमानदार सरकार देने का काम करते हैं। लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मतदाताओं को अपने अधिकार का प्रयोग करते हुए साबित करना होगा कि वह वाकई जागरुक मतदाता है।

इसके बाद सभी कानूनी तौर-तरीके का पालन करते हुए चुनाव मैदान में उतरें और फिर एक अच्छी सरकार देने में सहयोगी साबित हो सकें। बहरहाल लोकसभा चुनाव का बिगुल फूंका जा चुका है, इसलिए याद दिलाने की आवश्यकता भी आन पड़ी है कि जो लोग जाति, धर्म और सांप्रदायिकता के नाम पर वोट मांगते नजर आएं उन्हें भी सख्त जवाब देने की आवश्यकता है। जो लोग भाषा और बोली से लेकर क्षेत्र और खान-पान व पहनावे को लेकर समाज को बांटने और वोट कबाड़ने का काम करते हैं वो सही मायने में नफरत के सौदागर होते हैं उन्हें भी पहचानने की आवश्यकता है। उन्हें पहचानते हुए प्रेम और भाईचारे के साथ विकास की बात करने वालों को आगे करने की आवश्यकता है।

NEWSTODAYJHARKHAND.COM

Leave a Reply

Your email address will not be published.