• झारखंड का उभरता न्यूज़ पोट्रल न्यूज़ टुडे झारखंड में आप के गली मोहलले के हर खबर अब आप के मोबाइल तक आप के गली मोहल्ले की हर खबर को हम दिखाएंगे प्रमुखता से हमारे न्यूज़ टुडे झारखंड के संवादाता से संपर्क करे,ph..No धनबाद, 9386192053,9431143077,93 34 224969,बोकारो,+91 87899 12448,लातेहार,+919546246848,पटना,+919430205923,गया,9939498773,रांची,+919334224969,हेड ऑफिस दिल्ली,+919212191644,आप हमें ईमेल पर भी संपर्क कर सकते है हमारा ईमेल है,NEWSTODAYJHARKHAND@GMAIL........झारखंड के हर कोने कोने की खबर अब आप के मोबाइल तक सबसे पहले आप प्ले सटोर पर भी न्यूज़ टुडे झारखंड के ऐप को इंस्टॉल कर सकते है हर तरह के वीडियो देखने के लिए सब्सक्राइब करे यूट्यूब पर NEWSTODAYJHARKHAND......विज्ञापन के लिए संपर्क करे...9386192053.9431134077

ब्रह्माकुमारी संस्थान में होली मिलन समारोह का आयोजन

1 min read

रांची।

ब्रह्माकुमारी संस्थान में होली मिलन समारोह का आयोजन

रांची। होली जलाने का अर्थ पिछले वर्ष की कटु और तीखी स्मृतियों को जलाना और हॅसते-खेलते नये वर्ष का आवाह्न करना है। सृष्टि कर्ता परमात्मा अत्याचार रूपी हिरण्यकश्यप तथा दुःख, अशांति व भय रूपी होलिका के चंगुल से प्रहृलाद आर्थात प्रभु संतान समस्त आत्माओं को मुक्त करते हैं। ये उद्गार यहाॅ चैधरी बगान ब्रह्माकुमारी संस्थान में डा0 डी0के0 सिंह, निदेशक रिम्स ने होली मिलन समारोह में अभिव्यक्त किये।

राजेन्द्र सरावगी, अध्यक्ष नागरमल मोदी सेवा सदन ने कहा भारत में वर्ष फाल्गुन की पुर्णिमा को समाप्त होता है। पुराने वर्ष के अन्त में इस त्योहार का मनाया जाना इस रहस्य का परिचायक है कि यह पर्व कलियुग के अन्त में मनाया गया जिसके बाद सतयुग सुख-शांति के दिन शुरू हुए। वास्तव में योगाग्नि प्रज्वलित करने से ही हमारी पुरानी कटु स्मृतियाॅ मिट जाती है।

होलिका के दिन गोबर और घास-फुस को अग्नि की ज्वाला में जलाना वास्तव में मन की उबड़-खाबड़ दुषित वृतियों को योगाग्नि द्वारा भस्मसात करने की प्रेरणा देता है। गेहॅू और जौ की बालों को भूनने का अर्थ अपने पुराने दुषित संस्कारों को जलाने से है।

श्रीमती सोनी परवीन, पार्षद, वार्ड संख्या-29 ने कहा जैसे भुना हुआ बीज नए फल की उत्पति नहीं कर सकता बैसे ही ज्ञान योग युक्त अवस्था में किया गया कर्म विकर्म का रूप नहीं ले सकता। होली जलाने के बाद लोग गीत गाते, बजाते, झूमते, नाचते हैं, परंतु स्थूल नाच और गान तभी चरितार्थ होगा जब मन बुराईयों और चिंता से मुक्त और आनंदित होगा।

श्री दीपक, पी0आर0ओ0 सी0सी0एल0 अपने विचार व्यक्त करते हुए ने कहा इस संसार में दो ही रंग है – “ एक माया का रंग और दूसरा ईश्वर का रंग“। इस रंग मंच पर हर मनुष्य इन दोनो में से एक न एक रंग में तो रंगता ही है। ईश्वरीय रंग में रंगना ही श्रेष्ठ होली मनाना है। क्योंकि इस रंग में रंगा हुआ मनुष्य ही योगी है। माया के रंग में रंगा हुआ मनुष्य ही भोगी है। अब आत्मा की चोली को ज्ञान से रंग कर परमात्मा से मंगल मिलन मनाना चाहिए।

केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने इस अवसर पर कहा जो मनुष्य स्वयं को ज्ञान के रंग में रंगता है और सच्चा बैष्णव बनता है। उसे बैकुण्ठ में सुखद झुले पर झुलते हुए श्रीकृष्ण के दर्शण होते ही हैं। उसकी आॅख इस कलियुगी दुनिया से हट जाती है तथा उसे विषय विकार फिर अपनी ओर आकर्षित नहीं करते। होली का उत्सव उसके लिए भल उत्सव नहीं बल्कि ज्ञान मंथन उत्सव बन जाता है। ज्ञानी मनुष्य अपने संग से दुसरों पर भी ज्ञान का रंग चढ़ाता है। उनकी आत्मा रूपी चोली को भी परमात्मा की लाली में लाल करता है। आज तक दुसरों पर रंग डालने तथा परिचित अपरिचित सभी से प्रेम भाव से मिलने की जो रीति है उसका शुरू में यही रूप था कि परमात्मा शिव से ज्ञान प्राप्त करके मनुष्यों ने ज्ञान पिचकारी से एक दूसरे की आत्मा रूपी चोली को रंगा था तथा मन मुटाव त्याग कर मंगल मिलन तभी मना सकते हैं जब ज्ञान अबीर में आत्मा को रंगे और पुराने आचारों, विचारों व मनोविकारों को योग की अग्नि का इंधन बना दें। आवाह्न करते हुए उन्होंने कहा कि चन्द लकड़ियों और उपलों को इक्कठा करके जलाने को ही हम होली न मान लें बल्कि योगाग्नि में अपने पुराने एवं खराब संस्कारों को दग्ध करें।

इस अवसर पावन पर गणमान्य अतिथि के रूप में फैयाज वारसी, समाज सेवी, डा0 प्रियरंजन, प्रधान वैज्ञानिक बागवानी शोध संस्थान, पलाण्डू , प्रवीण चंचल, प्रबंधक सी0सी0एल0 एस0के0 मिश्रा, वरीय डाकपाल राॅची उपस्थित थे। कार्यक्रम में रंगों के साथ श्रीकृष्ण राधा रास रचा कर होली मनाई गई तथा गरबा नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में गाइडेड मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया। इसके अलावा अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। गुलाल से तिलक लगा कर फूलों से गुलाब जल छिड़क कर होली मनाई। ब्रह्मा भोग का भी आयोजन किया गया।

ज्ञातब्य हो चैधरी बगान, हरमू रोड, ब्रह्माकुमारी केन्द्र में प्रतिदिन निःशुल्क ज्ञान-योग कार्यक्रम उपलब्ध है।

NEWSTODAYJHARKHAND.COM

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ट्रेंडिंग खबरें