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ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा-एकाग्रता व ईश्वरीय दुआओं की तभी आवश्यकता होती है जब जीवन तनावग्रस्त हो।

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रांची।

ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा-एकाग्रता व ईश्वरीय दुआओं की तभी आवश्यकता होती है जब जीवन तनावग्रस्त हो।

रांची। आज के खुशनुमा राजयोग सत्र में बोलते हुए ब्रह्माकुमारी राजयोगिनी निर्मला बहन ने कहा कि राजयोग से मानसिक तनाव, उलझन, अशांति व रोगों से मुक्ति मिलती है। आत्मिक संतुष्टि, एकाग्रता, दृढ़ता, निर्णय एवं परखने की शक्ति में वृद्धि होती है। यह योग कुछ क्षणों का नहीं है बल्कि जीवन की श्रेष्ठ, दिव्य आदर्शमय बनाने का सुगम मार्ग है। एकाग्रता व ईश्वरीय दुआओं की तभी आवश्यकता होती है जब जीवन तनावग्रस्त हो। उन्होंने कहा इस सदी में तनाव और बढे़गा इसलिए इसका सामना करने व कम करने की विधि को अपनाना होगा। कर्म और योग का संतुलन, साधना व साधनों में संतुलन, भावना विवेक में बैलेन्स निश्चित सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। तनाव मुक्ति के कुछ टिप्स बताते हुए उन्होंने कहा जीवन की हरेक घटना में किसी न किसी रूप से लाभ होता है। सदा लाभ के बारे में ही सोचें। आज का दिन आपके हाथ में है। आज आप रचनात्मक काम करेंगे तो कल की गलती मिट जायेगी और भविष्य में भी लाभ होगा। अपनी तुलना अन्य से न करें। आपका निंदक आपका मनोचिकित्सक है। एक समस्या को एक समय सुलझायें। दूसरों का सहयोगी बनें। दृष्टिकोण बदली करें दुख सुख में बदल जायेगा। जो बात नहंी बदल सकती उसके बारे में न सोंचे। सृष्टि नाटक में हरेक अभिनेता है। किसी के अभिनय से प्रभावित न हों। बदला न लें – स्वयं को बदल लें। ईष्र्या न करें, ईश्वर का चितंन करें। दूसरों को सुख खुशी देने से खुद की खुशी बढे़गी। समस्या के समय – कर्जा चुक्तू हो रहा है ऐसा समझें। सूक्ष्म अहंकार छोड़ दें – खाली हाथ आए थे खाली हाथ जाना है। अपनी सब चिताएं परमात्मा को समर्पण करे दें। अन्त में उन्होंने कहा हर रोज थोड़ा समय ईश्वर से योग लगाओ रूहानी खुशबूदार रोजफ्लावर बनो। इससे चिंता जरूर दूर होगी।

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