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ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा- स्वास्थ्य एवं कल्याण का सुगम मार्ग है योग। क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…..

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रांची।

ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा- स्वास्थ्य एवं कल्याण का सुगम मार्ग है योग। क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…..

रांची। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के स्थानीय सेवाकेन्द्र चैधरी बगान, हरित भवन के सामने हरमू रोड, राॅची के तत्वावधान में मोरहाबादी मैदान में अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। रीतेशजी, व्यवसायी समाजसेवी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा – योग ही आरोग्य एवं सम्पूर्ण स्वास्थ्य की कंूजी है जो सारे मानवजाति के लिए है। उन्होंने कहा कि आज हम सभी क्लाइमेट चेंज की बात करते हैं, होलिएस्टिक हेल्थ की बात करते हैं, हम प्रकृति के साथ जुड़ने की बातें करते हैं, हम बैंक टू बेसिक की बात करते हैं, तब याद आता है योग।

“योग“ हमारी पुरानी पारम्परिक अमूल्य देन है। योग मन व शरीर, विचार व कर्म, समय व उपलब्धि की एकात्मकता का तथा मानव व प्रकृति के बीच सामंजस्य का मूर्त रूप है। यह स्वास्थ्य व कल्याण का समग्र दृष्टिकोण है।
विशालजी, अधिवक्ता समाजसेवी ने कहा योग केवल व्यायाम भर न होकर अपने आपसे तथा प्रकृति एवं विश्व के साथ तादात्म्य का माध्यम है। यह हमारी जीवनशैली में परिवर्तन लाकर तथा इससे जागरूकता उत्पन्न करके जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक हो सकता है।

कार्यक्रम में केन्द्र संचालिका ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने कहा राजयोग द्वारा मनुष्य का मानसिक तनाव दूर होता है, मन को शांति मिलती है और मस्तिष्क को तथा शरीर को भी आराम मिलता है। आज पूरा विश्व भारत की प्राचीन प्रद्धति योग पर पुनः लौट रहा है। सभी को लगने लगा है कि सिर्फ और सिर्फ राजयोग द्वारा ही मानव शरीर व मन का सम्पूर्ण इलाज संभव है। इसमें सभी जबतक एक जूट होकर प्रयास नहीं करेंगे तबतक यह कार्य पूर्ण नहीं होगा।

तो आइए हम अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस को आरंभ करने की दिशा में कार्य करें।
योग शारीरिक मानसिक और अध्यात्मिक संतुलन की भारत के 5000 वर्ष पुरानी ऐसी विधा है जिससे
मन और शरीर में तादात्म्य को बनाकर सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। शरीर और मन के बीच का
सुगम रास्ता, आत्मा और परमात्मा के बीच का फासला, कर्म और फल के बीच का सम्बन्ध तय करने का सामथ्र्य है “योग“ में। “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय“। मनुष्य को सर्वहित और सम्पूर्ण स्वास्थ्य की ओर ले जाने का सहज मार्ग ही है “योग“।
इस जहान को एकता के सूत्र में बांधने का महामंत्र है “योग“ इस शुभ अवसर मुविंग मेडिटेशन सहज राजयोग, कटि संचालन, गर्दन संचालन, हस्त संचालन के साथ अनेक मानसिक सशक्तिकरण के प्रयोग किये गये व अन्य योग का अभ्यास भी किया गया है।

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