दिल में सुराख संबंधित इलाज की जानकारी के लिए किया प्रेस कॉन्फ्रेंस

दिल में सुराख संबंधित इलाज की जानकारी के लिए किया प्रेस कॉन्फ्रेंस

NEWS TODAY (ब्यूरो चीफ-बबलु कुमार)बोकारो:- जन्म लेने वाले 100 बच्चों में 01 बच्चे के दिल में जन्मजात सुराख होता है यह आंकड़ा न केवल चिंता का विषय है बल्कि बच्चों तक सही इलाज की पहुंच की कमी की ओर भी इशारा करता है इसी चिंताजनक स्थिति को ध्यान में रखकर नारायण सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल हावड़ा ने मुस्कान हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के साथ मिलकर बीते 2 वर्षों से बोकारो में पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी क्लीनिक चला रहे हैं और बोकारो और इसके आसपास के जिले से आने वाले नवजात को नई जिंदगी दे रहे। इस प्रक्रिया में बहुत से गंभीर जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की बीमारी का पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी क्लीनिक में पता लगाया गया और नारायणा सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल हावड़ा में सर्जरी की गई और सर्वश्रेष्ठ इलाज दिए गए।

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इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करने के लिए मुस्कान हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया जहां अनुभवी डाक्टर संजीवन घोष कंसलटेंट पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट नारायणा सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल हावड़ा एसी मुंशी कंसलटेंट नैना टो लॉजिस्ट मुस्कान हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ने सफल इलाज के बारे में अपने विचार अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में ऐसे अभिभावक भी उपस्थित रहे जिनके बच्चों के इलाज के बाद सफल परिणाम सामने आए उन्होंने भी अपने अनुभव साझा की।

वही डॉक्टर संजीवन घोष ने कहा कि ऐसे बहुत से जन्मजात हृदय रोग हैं जिनका बच्चे की बढ़ती उम्र तक भी पता नहीं चल पाता है ऐसे में बच्चा लंबे समय तक बिना डायग्नोज के रहता है और इलाज मिलते मिलते देर हो जाती है कुछ शुरुआती लक्षण है जो यदि नवजात बच्चे में दिखाई दे तो संभव है कि उसको जन्मजात हृदय रोग है जैसे सामान्य से कम वजन बढ़ना लगातार चेस्ट इन्फेक्शन होते रहना स्तनपान में समस्या होना सांसे बढ़ना पसीना आने लगना दिल की धड़कन का अजीब तरह से आवाज होना बच्चे का नीला रंग पढ़ने लगना आदि इन्हीं लक्षणों का बच्चों पर दिखना समय पर उनका डायग्नोज करवाना जरूरी हो जाता है जिससे सही इलाज हो बच्चा स्वस्थ हो।

वही डॉक्टर एसी मुंशी ने कहा कि खासतौर पर बच्चों या नवजातों में हृदय रोग की यदि बात करें तो उनका जल्दी से डायग्नोज होना और जल्द से जल्द इलाज शुरू होना बेहद जरूरी है. लेकिन ध्यान देने वाली बात यह भी है कि लगातार बच्चे रोते रहते हैं और बीमार होते रहते हैं अक्सर शिशु के स्वभाव का हिस्सा माना जाता है ऐसे बच्चों के लिए तुरंत बिना देर किए संबंधित डॉक्टर से सलाह लें ताकि आने वाले जोखिम को रोका जा सके .साथ ही उन्होंने कहा कि फेटल इकोकार्डियोग्राफी एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए गर्भवती महिला के गर्भ में पल रहे 18 से 22 हफ्ते के शिशु में जन्मजात हृदय रोग का पता लगाया जा सकता है यह तकनीक बेहद कारगर है जिससे ना केवल जल्द से जल्द ऐसी बीमारियों का समय पर पता लग सकेगा बल्कि इलाज शुरू करने में भी आसानी होगी।

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