बिहार में मौसम का अजब खेल, 22 जिलों में सूखे के हालात तो 13 में बाढ़ से पानी ठेलमठेल।

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पटना।

बिहार में मौसम का अजब खेल, 22 जिलों में सूखे के हालात तो 13 में बाढ़ से पानी ठेलमठेल।

पटना। जी हां। बिहार में कुछ ऐसे ही हालात है। कई जिलों में बाढ़ से लोगों का रहना मुश्किल है तो कई जिलों में पानी के अभाव के कारण खेत सूख रहे हैं। बताते चलें कि बिहार के 13 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं, परंतु 22 जिलों में बारिश की कमी के कारण खेती के काम रूके हुए हैं। धान रोपन नहीं हो पाया है। खेत सूखे हुए हैं। वहीं राज्य के कई जिलों में पानी की वजह से ग्रामीण सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके अलावा चार-पांच जिले ऐसे भी हैं, जहां की ग्रामीण सड़कें आशंकि रूप से क्षतिग्रस्त हुई हैं। पूरे राज्य में 2679 ग्रामीण सड़कें व 26 पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि पानी उतरने के बाद 500 सड़कों पर यातायात बहाल कर दिया गया है। बता दें कि बीते 10 वर्षों में बाढ़ के पानी से सबसे ज्यादा ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। साल 2017 में लगभग तीन हजार ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई थीं। कटिहार, दरभंगा, किशनगंज, पूर्वी चम्पारण, पूर्णिया, मुजफ्फरपुर, अररिया, मधुबनी व पश्चिम चम्पारण जिले में सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभी क्षतिग्रस्त सड़कों की संख्या बढ़ सकती है। इनमें से कई सड़कें ऐसी हैं, जो हाल में बनी थीं और बाढ़ में बह गईं। जानकारी के अनुसार सहरसा में 36, सुपौल में 95, कटिहार में 230, किशनगंज में 220, अररिया में 294, सीतामढ़ी में 257, शिवहर में 430, पूर्वीचम्पारण में 375, पश्चिम चम्पारण में 105, दरभंगा में 258, मधुबनी में 458, खगड़िया में 17, मुजफ्फरपुर में 73, पूर्णिया में 213, मधेपुरा में 17 व समस्तीपुर में 31 ग्रामीण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। जलवायु परिवर्तन से वर्षा चक्र में तेजी से हो रहे बदलाव से उत्तराखंड भी अछूता नहीं है। पेड़ों के कटान, वाहनों की तादाद में बेतहाशा वृद्धि और इलेक्ट्रॉनिक अप्लाइंसेस के अधिक इस्तेमाल से वायुमंडल में पड़ने वाले असर के चलते वर्षा चक्र निरंतर गड़बड़ा रहा है। मौजूदा मानसून में हो रही कभी मूसलधार बारिश तो, कभी कुछ सूखे जैसे हालात, जलवायु परिवर्तन के बड़े संकेत हैं। आबादी के साथ ही वाहनों की संख्या में वृद्धि एवं तेजी से हो रहे औद्योगिकीकरण से हो रहे गैसों के उत्सर्जन ने वायुमंडल पर असर डाला है, जिससे वर्षा चक्र अनियमित हो रहा है। नतीजतन कभी सूखा, कभी अत्यधिक बारिश, बाढ़ के हालात, चक्रवात आदि की प्राकृतिक घटनाएं सामने आ रही हैं।

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