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बिहार में अगड़ा बनाम ‎पिछड़ा की लड़ाई में उलझा नेताओं का ग‎णित। पढ़ें पूरी खबर….

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पटना।

बिहार में अगड़ा बनाम ‎पिछड़ा की लड़ाई में उलझा नेताओं का ग‎णित। पढ़ें पूरी खबर….

पटना। ‎इस बार बिहार की 40 सीटों की आम चुनाव में बड़ी भूमिका होगी। क्यों‎कि ‎पिछली बार जहां 2014 लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते एनडी ने 31 सीटों पजि जीत हा‎सिल की थी तो इस बार भी एनडीए पिछली बार से भी बेहतर परिणाम की उम्मीद कर रहा है। Image result for अगड़ा बनाम ‎पिछड़ा की लड़ाई में उलझा नेताओं का ग‎णिततो राजद ने इस बार महागठबंधन के बूते परिणाम को उलटने के लिए मैदान में जोर-शोर से जुटा है। ले‎किन इस चुनावी घमासान में एनडीए से लेकर महागठबंधन को ‎बिगड़े ‎सियासी ग‎ठित के चलते कहीं नफा तो कहीं नुकसान उठाना पड़ेगा।

क्यों‎कि इस बार सूबे में जातियों का गणित उलझ गया है। जातियों को साधने की कोशिश में एनडीए के अंदर बीजेपी ने सवर्णों को तो जेडीयू ने पिछड़े-दलितों को अधिक टिकट दिया। पर, इस कोशिश में कहीं पिछड़ों-दलितों की नाराजगी तो कहीं जेडीयू को सवर्णों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है। इससे दोनों दलों को एक दूसरे के उम्मीदवारों को वोट ट्रांसफर करवाना चुनौती होगी। यही परेशानी कांग्रेस और आरजेडी के बीच भी है। इस बार जो महागठबंधन वोटों का ट्रांसफर बेहतर कराएगा वही फायदे में दिखेगा। एक दर्जन सीटों पर दोनों ओर चुनौती यही है।

ऐसे में एनडीए और महागठबंधन दोनों को कहीं फायदा तो कहीं नुकसान उठाना पड़ रहा है। अगड़े बनाम पिछड़े की लड़ाई में स्थानीय नेताओं की मांग बढ़ गई है। एक दर्जन से अधिक सीटों पर अगड़ा बनाम पिछड़ा की ऐसी सियासी गोलबंदी हुई कि उन सीटों पर कौन नेता प्रचार के लिए जाएंगे, इस बारे में भी माथापच्ची की जा रही है।
एनडीए इस बार प्रदेश की सीटों पर स्थानीय मुद्दे को दरकिनार कर पूरी तरह मोदी के नाम पर चुनाव लड़ रहा है। भाजपा के साथ-साथ नीतीश कुमार की जेडीयू भी मैदान में मोदी लहर के भरोसे ही दिख रही है। स्थानीय स्तर पर ऐंटी इनकम्बैंसी को मोदी लहर से काटने की मंशा कहीं न कहीं सफल भी होती दिख रही है। इसका आभास राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन को है। इसीलिए वे हर सीट पर मोदी नहीं मुद्दे पर आएं का नारा देते दिख रहे हैं। उनकी पूरी मंशा है कि चुनाव स्थानीय मुद्दे पर हो।

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