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बजट 2018: समझें बजट का आप पर असर और बजट की खास बातें |

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केन्द्र सरकार ने अपने कार्यकाल का आखिरी पूर्ण बजट पेश कर दिया है. इस बजट में केन्द्र के बजट के बाजार और उद्योगों के लिए दो तथ्य महत्वपूर्ण हैं एक- राजकोषीय घाटे का आंकड़ा और दूसरा – शेयर बाजार पर कैपिटल गेन टैक्स. वहीं इस बजट के जरिए केन्द्र सरकार ने देश के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ बीमा योजना का ऐलान किया है. न्यूज़ टुडे झारखण्ड मुताबिक मोदी सरकार के इस आखिरी पूर्ण बजट की प्रमुख बातें और उनका विश्लेषण:

1. बजट खेती – इस साल के बजट 21 लाख करोड़ रुपये के बजट में खेती को मिले थे केवल 56000 करोड़ रुपये. दो लाख करोड़ रुपये से ऊपर का खर्च केवल एफसीआई को खाद्य सब्सिडी और उर्वरक पर दो

लाख करोड़ रुपये का खर्च.  इसका विश्लेषण- फसल समर्थन मूल्य बढेंगे- महंगाई से सावधान – सभी फसलों पर डेढ़ गुना समर्थन मूल्य देने का नीतिगत फैसला. ध्यान रहे कि 2014 में भाजपा सरकार ने ऊंचे समर्थन मूल्य को महंगाई बढ़ाने वाला माना था. केंद्र राज्य सरकारों के बजट पर बोझ बढ़ना तय है.

2. फूड प्रोसिंसिग उद्योग के लिए अच्छी घोषणा- बागवानी में उद्योग की तर्ज पर क्लस्टर विकसित करने की योजना. बिहार हिमाचल प्रदेश, उत्ततराखंड, उत्तयरपूर्व को फायदा होगा.

3. फॉमर्स प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव – किसान कंपनी पार्टनरशिप- एक अच्छा प्रयोग है जो कुछ राज्यों में सक्रिय है. बजट में इसके लिए प्रोत्साएहन से अन्य राज्यों में भी इसे विस्तांर मिलेगा.

4. फसल समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करने का फैसला इस बात पर निर्भर होगा कि सरकार फसल की लागत की गणना कैसे करती है. खेती की लागत को लेकर नई बहस शुरु होने के आसार हैं.

5. फॉमर्स प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन को इनकम टैक्स रियायत भी मिलेंगी. इसका विश्वेषण- फसल समर्थन मूल्य डेढ़ गुना करने का फैसला इस बात पर निर्भर होगा कि सरकार फसल की लागत की गणना कैसे करती है. खेती की लागत को लेकर नई बहस शुरु होने के आसार हैं.

6. सस्ते मकान के लिए नेशनल हाउसिंग बैंक के तहत नया फंड बनेगा लेकिन वित्त्त‍ मंत्री उसका आकार नहीं बताया. इसका विश्लेषण- ग्रामीण विकास व बुनियादी ढांचा स्कीमों की नई पैकेजिंग – सड़क, शौचालय, बिजली को ग्रामीण रोजगार से जोड़ा – ग्रामीण बजट से रोजगार बढ़ने का दावा किया गया.

इसका विश्लेषण – शिक्षा के बुनियादी ढांचे के लिए नया कार्यक्रम लेकिन वित्तज मंत्री ने बजट नहीं बताया. लगता है कि शिक्षा के बजट में बड़ी बढ़ोत्तरी नहीं हुई है.

 

7. यह रही मोदीकेयर- ओबामाकेयर जैसी नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम 50 करोड़ लोगों- पांच लाख रुपये का इलाज कवरेज- विस्तृत ब्योरे का इंतजार रहेगा. शुरुआती तौर पर यह बीमा स्कीम लगती है. विश्लेषण – मोदीकेयर पर उत्सा हित होने से पहले पिछली प्रधानमंत्री हेल्थ बीमा योजना का प्रदर्शन याद रखिये. सरकारी इलाज बीमा योजनाओं का प्रदर्शन बुरी तरह खराब रहा है. इस स्की्म से तात्कांलिक फायदा निजी अस्पतालों को होगा. इसका विश्लेषण- नेशनल हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम, अगर पूरे देश में लागू हुई तो क्लेम्स का अनुमानित आकार 2.5 खरब रुपये तक हो सकता है. बजट में इसके लिए कितना धन दिया गया है इसे देखना होगा.

8. शेयर बाजार की निगाह से – हेल्थ बीमा स्कीम का फायदा सरकारी बीमा कंपनियों और निजी अस्पतालों को, खेती की घोषणायें ट्रैक्टजर, खाद्य प्रसंस्करण के लिए कंपनियों को फायदा होगा.

 9. बजट अभी तक – आखिरी बजट में सरकार ने कई नई मंजिलें निर्धारित की हैं. चुनावी साल में हेल्थ बीमा, शिक्षा बुनियादी ढांचा, लघु उद्योग प्रोत्साहन का क्रियान्वयन मुश्किल होगा. हेल्थ बीमा पहले बजट में लाई जा सकती थी.

10. बजट अब तक – पुरानी मंजिलें भुला दी गई हैं. स्वकच्छता मिशन, फसल बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, स्मॉर्ट सिटी का प्रमुखता से जिक्र नहीं. मुद्रा की योजना की सामान्य चर्चा की गई.

11. बांड बाजार – कंपनियों को कर्ज के लिए बाजार की तरफ मोड़ा जाएगा. सेबी को दी गई जिम्मेदारी. यह कदम बैकों पर कंपनियों को कर्ज देने की जिम्मेदरी कम करेगा और बांड व डेट बाजार को ताकत देगा . यह कदम बेहद जरुरी था. इसका विश्लेषण- समर्थन मूल्य  बढ़ाने की नीति लागू करने के लिए एफसीआई की पूंजी बढ़ाई जा रही है. 2014 में सरकार एफसीआई पुनर्गठन करना चाहती थी. शांता कुमार की अध्यक्षता में समिति भी बनी थी.

12. सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों का विलय होगा. नेशनल हेल्थ इंश्यो रेंस स्कीम उनके लिए सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होने वाली है.

13. सांसदों के लिए वेतन आयोग! हर पांच साल में अपने आप बढेंगी तनख्वा हें व भत्ते. नया कानून प्रस्तावित किया गया है.

14. राजकोषीय घाटे में जोरदार बढ़ोत्तरी. इस साल के लिए 3.5 फीसदी घाटे का अनुमान. अगले साल 3.3 फीसदी का लक्ष्य. 3.5 से 3.3 फीसदी पर लाना बहुत आसान नहीं होगा. शेयर बाजार के लिए ये संकेत नकारात्मक होने का आसार है.

15. 250 करोड़ तक की कंपनियों के लिए कारपोरेट टैक्स की दर 25 फीसदी. शेयर बाजार में मिड कैप कंपनियों की चांदी. बड़ी कंपनियों को निराशा. शेयर बाजार की तेजी पर अब लगेगा ब्रेक- लांग टर्म कैपिटेल गेंस टैक्स का चाबुक. एक लाख रुपये तक के निवेश पर दस फीसदी टैक्स. 20 हजार करोड़ का राजस्व मिलेगा. आयकर रियायतों का हिसाब बराबर. इसका विश्लेषण – शेयर बाजार पर दोहरी मार – शेयर बाजार पिछले चार साल की सबसे चमकदार कहानी थी. बजट ने इस पर दोहरा वार किया है. लांग टर्म कैपिटेल गेंस टैक्स भी आ गया और राजकोषीय घाटा भी बढ़ गया.

 

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