पीटीआर क्षेत्र में रुकने का नाम ही नही ले रहा बाइसन की मौत का सिलसिला….

पीटीआर क्षेत्र में रुकने का नाम ही नही ले रहा बाइसन की मौत का सिलसिला….

NEWS TODAY (रवि कुमार गुप्ता)लातेहार/बरवाडीह:-बेतला नेशनल पार्क बाइसन के लिए कब्रगाह बनता जा रहा है।रविवार देर शाम पीटीआर क्षेत्र में फिर एक बाइसन की मौत हो गई है। अभी तक पिछले दिनों दो बाइसन की मौत की कारणों की रिपोर्ट भी नही आई है और फिर से पार्क क्षेत्र एक और बाइसन की मौत हो गई।
बताते चले कि इसी महीने दो बाइसन(जंगली भैसा) की मौत संदेहास्पद परिस्थितियों में हो गई थी,जिसका अन्तरिम परीक्षण स्थानीय पशु चिकित्सक से कराया गया था,जिसमे बाइसन की मौत संक्रमण के कारण होने की संभावना व्यक्त की गई थी।बाइसन के आंतरिक मुख्य अंगों को जांच के लिए राँची एवं कोलकाता भेजा गया था,पर अभी तक उसकी जांच रिपोर्ट आई भी नही थी कि बेतला पार्क में कल देर शाम असनाही नाला के पास एक और बाइसन काल के गाल में समा गया।पिछले दो बाइसनों के मौत के बाद वन विभाग के आलाधिकारी पीटीआर क्षेत्र पहुँच कर लगातार कैम्प किये हुए थे एवं कई तरह के आवश्यक दिशानिर्देश भी कर्मियों के दिया गया था। उसके बावजूद फिर से एक बाइसन को जान से हाथ धोना पड़ा।
मालूम हो कि रविवार को इस मादाबाइसन पहले से ही बीमार थी। चिकित्सकों ने पहले आशंका जताई थी कि इस बाइसन को जिंदा नही रख पाना मुश्किल है।राँची से विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई थी। इससे पहले पिछले महीने के उनतीस अप्रैल औऱ चार मई को भी दो बाइसनों की मौत हो चुकी है।स्थानिय पशु चिकित्सक ने इन मौतों का कारण काँटेजियस बोमिन ल्युरो निमोनिया(सीबीपीपी)नामक संक्रमण बीमारी बताया था। जो काफी खतरनाक है। हालांकि अभी तक लेब जांच रिपोर्ट नही प्राप्त हुआ है। राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) शशि नंद कुलियार एवं पीसीसीएफ(वाइड) पीके वर्मा बेतला नेशनल पार्क का दौरा कर चुके है।झारखण्ड के बेतला नेशनल पार्क में सत्तर बाइसन पार्क की शान है पर अब इन पर खतरा मंडरा रहा है। अगर विभागीय आंकड़ो की माने तो पार्क में सात अलग-अगल मे पार्क में विचरण करते है।

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बताते चले कि इसी साल 15 फरवरी को भी पीटीआर क्षेत्र में बाघिन की मौत जंगली भैसे के हमले में हुई थी।देखा जाए तो संक्रमण के कारण बाइसन के साथ-साथ अन्य जंगली पशुओं पर खतरा बना हुआ है।अब देखना ये है कि एक बाघिन और तीन बाइसन के मौत के बाद भी वन अधिकारी जागते है युही शीत निंद्रा मैं रहेंगे।

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