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परिस्थिति से प्रभावित और उत्तेजित हो जाने से हमारे अन्दर निर्णय करने की शक्ति खत्म हो जाती हैःब्रह्माकुमारी निर्मला बहन

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रांची।

परिस्थिति से प्रभावित और उत्तेजित हो जाने से हमारे अन्दर निर्णय करने की शक्ति खत्म हो जाती हैःब्रह्माकुमारी निर्मला बहन

रांची। परिस्थिति से प्रभावित और उत्तेजित हो जाने से हमारे अन्दर निर्णय करने की शक्ति खत्म हो जाती है। जीवन में सदा खुशी रहने के लिए हर परिस्थिति में हमें सकारात्मक विचार की शिक्षा लेनी होगी। यह विचार यहाॅ चैधरी बगान, हरमू रोड ब्रह्माकुमारी केन्द्र में ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने व्यक्त किये।

आपने कहा हम आत्माएं यहाॅ इस सृष्टि कर्मक्षेत्र पर पार्ट बजाने आये हैं, लेकिन हम इस सच्चाई को भूल गये हैं। हम यह भूल गये हैं कि यह शरीर तो केवल एक वस्तु मात्र ही है। अब हमें जब यह समझ मिलती है तो हमारे विचार भी बदलना आरंभ कर देते हैं। परिस्थितियों रूपी कर्मभोग तो जीवन में आना आवश्यक है। कर्मों का हिसाब तो सबको चुक्तू करना ही होगा। हम किस प्रकार उसको अनुभव करते हैं, अपने जीवन में यह हमारे ऊपर निर्भर करता है।

जब बहुत शारीरिक दर्द दुःख है तब कुछ क्षणों के लिए ऐसा अनुभव कीजिए कि हम यह शरीर हैं ही नहीं। मैं एक आत्मा हॅू, ज्योती हॅू। यह देह तो ऊपरी आवरण है, अब इससे परे हो जायें, बिलकुल शान्त हो जायें। जैसे देह से मुक्त मैं बिलकुल हल्की शक्ति हूॅ और कुछ घड़ियों में आप अनुभव करेंगे कि दर्द होते हुए भी दर्द नहीं है। हम महसूस करेगें कि जो भी देह-भान के कारण दुःख मिलते हैं, आत्मा की शक्ति से वह दुःख सहज पार हो जाते हैं। अगर हम अपने जीवन को सुखी बनाना चाहते हैं, तनाव से मुक्त करना चाहते हैं तो अपने विचारों को सकारात्मक बनाना होगा। हृदय में यह आना चाहिए कि मुझे सबको सुख देना है। सुख लेना नहीं है, दुआयें लेनी है। सुख तो भौतिक है जिसे हम अतीन्द्रिय सुख कहते हैं, वह लेना है।

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