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धनबाद :महिलाओं द्वारा विधि विधान से बरगद के पेड़ पर की गई वट सावित्री पूजा, दिखी सुहागिनों की भीड़…..

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धनबाद :महिलाओं द्वारा विधि विधान से बरगद के पेड़ पर की गई वट सावित्री पूजा, दिखी सुहागिनों की भीड़…..

NEWSTODAYJ_धनबाद : कोयलांचल में गुरुवार की सुबह से ही अखंड सुहाग के लिए महिलाओं ने जगह-जगह वट सावित्री पूजा की। धनबाद में महिलाएं समूह में निकलीं और और विधि विधान से बरगद के पेड़ पर पूजा कर प्रसाद चढ़ाया। पुजारियों को दान दक्षिणा भी दिया। व्रती महिलाओं ने 108 बार बरगद की परिक्रमा की। ब्राह्मणों ने महिलाओं की कथा भी सुनाई मान्यता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को यमराज से वापस लिया था। पूजा से पहले महिलाओं ने सुबह स्नान के बाद शृंगार किया।

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सभी मुहल्लों में महिलाओ ने की पूजा

शहर के बरटांड़, धैया, हीरापुर, स्टीलगेट, बैक मोड़, मनईटांड़, बेकारबांध सहित सभी मुहल्लों में महिलाएं 16 शृंगार कर, हाथ में पूजा की थाली व जल लेकर प्रसाद के रूप में थाली में गुड़, भींगे हुए चने, आटे की बनी मिठाई, कुमकुम, रोली, पांच प्रकार के फल, पान का पत्ता, धूप, दीप और बांस का पंखा लेकर नजदीकी वट वृक्ष के पास पहुंचीं और पूजा अर्चना की। वट वृक्ष को पूजने के लिए महिलाओं ने अपनी मान्यता के अनुसार 5, 7, 11, 21, 51, और 101 बार वट वृक्ष की परिक्रमा कर उसमें सूत बांधा। महिलाओं ने शृंगार और आशीर्वाद के रूप में वट वृक्ष के पत्ते को अपनी चोटी में सजायी। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगायी।

सावित्री-सत्यवान की कथा

इसके बाद पुजारी से वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी। सावित्री ने यमराज से हठ कर वट वृक्ष के नीचे ही अपने पति की जान बचाई थी। घर आकर महिलाओं ने पति के पैर पघारे, शर्बत-पानी दिया और बेनी (बांस से बने पंखे) झेले। महिलाओं ने गुरुवार को पूरे दिन उपवास रहकर व्रत रखा।

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