देवघर : श्रावण मास में भगवान भोले की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक अश्वमेध यज्ञ के बराबर , आइए जानते हैं इस श्रावण मास में कौन-कौन सी शुभ तिथि मौजूद है… 

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NEWSTODAYJ देवघर : श्रावण मास जिसे शिव का महीना माना जाता है. कहा जाता है कि श्रावण मास में भगवान भोले की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल प्राप्त करने जैसा योग होता है.देवों की नगरी देवघर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से अछूता नहीं रहा है.यही कारण है कि इस बार श्रावणी मेले का आयोजन स्थगित कर दिया गया है.भले ही श्रद्धालु नहीं आएंगे और जलाभिषेक भी नहीं होगा लेकिन इस बार का श्रावण मास विशेष संजोग लेकर आ रहा है खास बात यह है.कि श्रावणी मेले की शुरुआत गुरु पूर्णिमा के दिन श्रावणी मेले के उद्घाटन के साथ होता आया है.

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और ठीक इसके दूसरे दिन से श्रावणी मेला की शुरुआत हो जाती है इस बार सावन महीने की शुरुआत प्रतिपदा तिथि सोमवार से शुरू हो रहा है जिसे सिद्धि योग माना जाता है जबकि श्रावण मास  की समाप्ति पूर्णिमा और सोमवारी को ही हो रहा है  कुल मिलाकर योग के हिसाब से सावन महीने का आरंभ सिद्धि योग से और समापन अमृत योग से हो रहा है .जो काफी शुभ माना जा रहा है.पूरे 1 महीने का यह मास में पांच सोमवारी का योग बन रहा है.देवघर बाबा मंदिर के पुजारी प्रमोद श्रृंगारी की मानें तो ऐसा संजोग काफी कम मिलता है.इस बार बंगला सावन 16 जुलाई से है.और बांग्ला सावन में भी पांच सोमवारी का योग है इसके अलावा पुरोहित बताते हैं.कि योग के हिसाब से 10 पद श्रीजीत हैं.जिसमें से 3 पद चंद्रमा को मिला है.चंद्रमा शिव को प्यारा है .और चंद्रमा भगवान भोले के मस्तक पर विराजमान हैं.इस बार श्रावणी मेले का आयोजन नहीं हो रहा है.ऐसे में वर्षों पुरानी परंपरा सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा से जल भर कर देवघर बाबा मंदिर में चढ़ाने की परंपरा रुक गई है.कहा जाता है कि श्रावण मास में गंगा से जल भरकर भगवान भोले पर चढ़ाने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है लेकिन कोरोना संक्रमण जैसी वैश्विक महामारी के बीच वर्षों पुरानी परंपरा आज टूट गई देवघर बाबा मंदिर में पूरे श्रावण मास में सिर्फ सुबह और शाम की सरकारी पूजा ही संपन्न होगी जिसको भक्तों तक ऑनलाइन दर्शन के जरिए पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है.पुरोहित बताते हैं कि जो व्यक्ति बाबा धाम नहीं आ सकते और शिवलिंग पर जल अर्पण नहीं कर सकते वह अपने घर में ही फूल बेलपत्र और गंगाजल से निकट के मंदिरों में जल अर्पण कर पुण्य के भागी बन सकते हैं.

आइए जानते हैं इस श्रावण मास में  कौन-कौन सी शुभ तिथि  मौजूद है 

25 जुलाई नाग पंचमी

15 दिन शिव वास

1,16 और 30 जुलाई एकादशी

2 जुलाई और 18 जुलाई प्रदोष

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