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तीन सौ वर्ष पुराना है पोद्दारपाड़ा रक्षा काली धाम का इतिहास, ज्येषष्ठ माह की आमावस को होती है विशेस अराधना

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(धनबाद)

तीन सौ वर्ष पुराना है पोद्दारपाड़ा रक्षा काली धाम का इतिहास, ज्येषष्ठ माह की आमावस को होती है विशेस अराधना…!

झरियाः झरिया पोद्दारपाड़ा स्थित रक्षा काली मंदिर में रविवार को 24 घंटे का अनुष्ठान शुरू हुआ। दिन भर उपवास रख शाम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने राजा तालाब में स्नान किया। तत्पश्चात भूमि पर दंडवत करते हुए रक्षा काली धाम पहुंचे। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह कृष्णपक्ष की अमावस्या तिथि को यह उत्सव रक्षा काली धाम में होता है। जिसमें भाग लेने के लिए झरिया, धनबाद के अलावा विभिन्न क्षेत्रों के भक्त झरिया पहुंचते है। पोद्दारपाड़ा स्थित रक्षा काली मां के प्रति लोगों की काफी आस्था है। लोगों के अनुसार रक्षा काली मां भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती है। मंदिर की हुई है भव्य सजावट
रक्षा काली पूजा को ले मंदिर की भव्य सजावट हुई है। रविवार की सुबह से ही पूजा की तैयारी में समिति के सदस्य सक्रिय रहे। रविवार की शाम 6.30 बजे के बाद पूजन विधान शुरू हुआ। रात 9 बजे राजा तालाब कलश स्थापना में लिए गाजाबाजा के साथ पर्वित्र जल लाया गया। प्रतिमा निर्माण के बाद रक्षा काली की विघि विदान से पूजा हुई। आधी रात के बाद बलि पूजा संपन्न हुई। मंगल आरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच खिचड़ी भेग बांटा गया।
लगभग तीन सौ वर्ष से जारी है पूजाझरिया पोद्दारपाड़ा रक्षा काली मंदिर में जारी मां काली की विशेष पूजा लगभग तीन सौ वर्ष पुरानी है। कहते है कि राजा शिव प्रसाद सिंह के पूर्वजों ने रक्षा काली पूजा की शुरूकृआत की थी। जो लगातार जारी है। आायोजन का शुरूआत दिन ढलने के साथ शुरू होती है और दूसरे दिन सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाती है। इस बारह घंटे के दौरान ही मां रक्षा काली की प्रतिमा निर्माण कर उनकी विशेष पूजा होती है। रात भर मंदिर परिसर में मेला का माहौल रहता है। रात के अंतिम प्रहर यानी सूर्योदय के पहले ही रक्षा काली की बनी प्रतिमा को विसर्जित कर दिया जाता है। हजारों की भीड़ मंदिर एवं आसपास रात भर जमी रहती है।
दूसरे प्रदेश से भी आते है लोग
रक्षा काली पूजा में शामिल होने के लिए दूसरे प्रदेश के भी भक्त आते है। पोद्दारपाड़ा, धीवर पाड़ा, मिश्रा पाड़ा, अमलापाड़ा का शायद ही कोई घर हो जहां उनके रिश्तेदार इस पूजा मां शामिल होने नहीं पहुंचे हो। लोगों के अनुसार झारखंड के अलावा बिहार, बंगाल, उड़ीसा, एवं छत्तीसगढ़ में बसे उनके रिश्तेदार पूजा में शामिल होने पहुंचते है। मां रक्षा काली पुजा समिति के सदस्यों की सक्रिय भुमिका इस दौरान रही।NEWSTODAYJHARKHAND.COM

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