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झारखंड विकास मोर्चा ने किया राज्य सरकार का पुतला दहन

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धनबाद।

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झारखंड विकास मोर्चा ने किया राज्य सरकार का पुतला दहन…..

झारखंड विकास मोर्चा (प्र0) द्वारा जिला मुख्यालय रणधीर वर्मा चौक में राज्य सरकार का पुतला दहन किया गया।

इस मौके पर केंद्रीय महासचिव रमेश कुमार राही ने कहा कि जब से देश और राज्य में भाजपा की सरकारें बनी है तभी से बहुमत एवं जनमत का दुरुपयोग कर गांव, गरीब, किसानों-मजदूरों के विरोध में सरकार कानून बना रही है और चंद बड़े-बड़े उद्योगपतियों को बड़ी होशियारी से लाभ पहुंचा रही है।

यह सिलसिला 2014 से जो प्रारम्भ हुआ वह आज भी बदस्तूर जारी है।

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ज्यों ही सरकार बनी, अपनी पहली कैबिनेट की बैठक में ही अध्यादेश के माध्यम से भूमि अधिग्रहण कानून-2013 के कई प्रमुख बिन्दुओं को बदलने का प्रयास किया गया जो किसानों के हित में था।

80 % रैयतों की सहमति प्राइवेट कम्पनी के लिए एवं 70% रैयतों की सहमति सरकारी कम्पनी के लि. जमीन जिस उद्देश्य से ली जायेगी यदि 5 वर्षों मेें कम्पनी उस काम को करने में असफल रही तो मूल रैयतों को जमीन वापसी.जमीन अधिग्रहण की गड़बड़ी को न्यायालय में चुनौती देने के रैयतों को अधिकार…

को बदलने का असफल प्रयास किया।
इसके बाद से ही झारखंड भाजपा सरकार ने रैयतों की जमीन छीन कर असानी से उद्योगपतियोें को कौड़ियों के भाव देने के लिए सी0एन0टी0 एवं एस0पी0टी0 एक्ट में संशोधन का प्रयास, तीव्र प्रतिरोध एवं संघर्ष के कारण संशोधन रुका।

लैंड बैंक बनाकर वर्षों से खास, गैरमजरुआ, सरकारी जमीन जो गांव, गरीब-किसानों के अधिकार में था, उसको छीनकर उद्योगपत्तियों को दे दिया सरकारी जमीन जो पूर्व से 30 वर्षों के लिए लीज पर उद्योगपतियों को ऊंचे दर पर दी जाती थी,

उस दर को घटाकर आधा कर दिया गया साथ ही प्राइवेट कम्पनियों को सरकारी जमीन हस्तांतरण करने का नया नियम बना डाला। अडाणी कम्पनी को लाभ पहुंचाने के लिए गोड्डा की जमीन की कीमत 164 लाख/ एकड़ मुआवजा से घटा कर 13 लाख/एकड़ कर कम्पनी को सीधा 7500 करोड़ का लाभ दिया। साथ ही ऊर्जा नीति-2012 में परिवर्तन कर कम्पनी को 296 करोड़/वर्ष का मुनाफा दिया।

वर्तमान सत्र में सरकार ने किसानों, मजदूरों एवं चुने हुए जनप्रतिनिधियों का हक एवं अधिकार छीनने वाला झारखंड नगर पालिका संशोधन विधेयक-2018
इस विधेयक के माध्यम चुने हुए प्रतिनिधियों को जो-
मात्र तीन बैठकों में अनुपस्थित होगा। अस्वस्थता के कारण भी छः माह यदि वह दायित्वों का निर्वाहरन नहीं कर पायेगा या…

मात्र प्राथमिकी दर्ज होने पर, नगर परिष्द के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एवं महापौर, उपमहापौर की सदस्यता चली जायेगी। श्रम कानून संशोधन विधेयक-2018
एक तरफ सीएम खुद को मजदूर नंबर वन बताते नहीं अघाते हैं। वहीं दूसरी ओर मजदूरों के अहित में सबसे अधिक यही सरकार लगी है। किसी कम्पनी या कल-कारखाने में अब 50 मजदूर तक कोई भी श्रम-कानून लागू नहीं होगा…

जबकि पहले यह संख्या सीमा महज 10 थी। स्वाभाविक है इससे मजदूरों के दोहन और शोषण में वृद्धि होगी। भूमि अधिग्रहण-2013 मंे जो संशोधन किया है, उससे अब सामाजिक प्रभाव का मूल्यांकन भी नहीं होगा।

और कृषि योग्य भूमि को बेहिचक अधिग्रहण किया जा सकेगा।झारखंड जल, गैस को ड्रेनेज पाईप लाईन विधेयक-2018
इस विधेयक के बाद बिना रैयतों की सहमति के ही सरकार अधिसूचना जारी कर किसी प्रकार की जमीन आवासीय हो या खेती वाली, इन कार्यों के लिए बिना मुआवजा के जर्बदस्ती अधिग्रहण कर सकेगी।

मुख्यमंत्री जिस तरह सदन में अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहे हैं एवं विधायक प्रदीप यादव जी को जेल भेजने की धमकी दे रहे हैं, यह सदन की सदस्यों की मर्यादा का हनन है, ऐसे मुख्यमंत्री को अविलम्ब पद से हटाना चाहिए।

यदि आप विरोध-करेंगे तो रैयतों को आर्थिक दंड या जेल की सजा का हकदार बनना है। ये सारे कानून-किसके पक्ष में है आसानी से समझा जा सकता है।

पुतला दहन कार्यक्रम में अजीत पांडे फिरोज दत्ता कन्हैया पांडे जगनाथ महतो बंटी राय गौर महतो उमेश मंडल शिवशंकर दास संजय महतो लखपति सिंह भीम दे अमित वर्मा दीपक महतो गुड्डू वर्मा मनोज महतो प्रदीप विश्वकर्मा टीपू हांसदा देवदीप बनर्जी भास्कर शर्मा संजय चटर्जी पप्पू गद्दी कांति धीवर राकेश दास प्रेम महतो आभास सिंह आदि काफी लोग शामिल थे…

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