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जीवन का समग्र रूप पृथ्वी की सतह पर एक पतली परत में ही सीमित है।

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नई दिल्ली।

(जैव विविधता दिवस 22 मई पर विशेष)

जीवन का समग्र रूप पृथ्वी की सतह पर एक पतली परत में ही सीमित है।

Image result for जैव विविधता दिवस 22 मई पर विशेषनई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा जैव विविधता के लिए अन्तर्राष्ट्रीय दिवस प्रतिवर्ष 22 मई को मनाने की घोषणा की गयी है। यह दिवस मानव जाति को जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रेरित करता है। यह दिवस जन समुदाय तथा उसके लीडर्स को जैव विविधता के संरक्षण से होने वाले लाभों के बारे में शिक्षित करने का सुअवसर प्रदान करता है।

जैव विविधता का संरक्षण संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख लक्ष्यों में से एक है। यह दिवस जैव विविधता के संरक्षण के लिए विश्व के सभी देशों को प्रेरित करता है।Related image धरती को जैव विविधता के क्षरण से बचाने के ऐसे कई तरीके हैं जिसके लिए हम अकेले और सामूहिक रूप से वातावरण बनाने में अपना यथाशक्ति योगदान दे सकते हैं। इस दिशा में हमें रोजाना कुछ न कुछ करते रहने का संकल्प लेना चाहिए।

जीवन का समग्र रूप पृथ्वी की सतह पर एक पतली परत में ही सीमित है

अभी तक ज्ञात संपूर्ण ब्राह्माण्ड में पृथ्वी ही एकमात्र ऐसा ग्रह है, जहां जीवन व्याप्त है। यहां सूक्ष्म पौधों से लेकर विशाल वृक्ष विद्यमान हैं, तो सूक्ष्म अमीबा से लेकर हेल जैसे विशाल प्राणी भी हैं। पृथ्वी पर लगभग दस लाख जीवधारी रहते हैं। इन जीवधारियों में मनुष्य का स्थान सर्वप्रमुख हैं। जीवन का समग्र रूप पृथ्वी की सतह पर एक पतली परत में ही सीमित है। प्रकृति जीवन के विविध रूपों का एक उलझा जाल है। Image result for जैव विविधतापर्यावरण के निर्जीव, किन्तु अभिन्न अंगों, यथा-मिट्टी, जल, वायु ताप आदि एक-दूसरे को सतत्् प्रभावित करते रहते हैं। प्रकृति ने धरातल, समुद्रों, नदियों, झीलों आदि में विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और उभयचर, जलचर तथा थलचर जीवों का सृजन किया है। जैव-विविधता के अंतर्गत पौधों, पशुओं और सूक्ष्म जीवों की सभी प्रजातियों तथा पारिस्थितिकी और उससे सम्बद्ध समस्त प्रक्रियाएं सम्मिलित हैं। यह पृथ्वी पर जीवन का आधार है। जैव-विविधता सामाजिक, नैतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक सभी दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

पृथ्वी में नाना प्रकार के जीवन के पोषण की अद्वितीय क्षमता विद्यमान है

विभिन्न रूपों में पृथ्वी पर प्रकृति का विकास करोड़ों वर्षों की लम्बी प्रक्रिया के बाद हुआ है। पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के साथ ही जंतुओं की प्रजातिगत विविधता भी विद्यमान है। पृथ्वी पर अनेक प्रकार के जीवों की उत्पत्ति हुई और इनमें कई जीव समय-समय पर विलीन भी हो गए, यथा-डायनासोर और उसकी अन्य प्रजातियां आज से लगभग 7+50 करोड़ वर्ष पूर्व ही पृथ्वी से सदा के लिए विलुप्त हो गयी। प्रकृति और जीवन में सूक्ष्म संतुलन है और पृथ्वी में नाना प्रकार के जीवन के पोषण की अद्वितीय क्षमता है।

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