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जरा हटके:2 इंजीनियर नौकरी के बाद लगाते हैं बिरयानी का ठेला,हजारों में होती है कमाई

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NEWSTODAYJ_ओडिशा के मलकानगिरी में हर शाम कलेक्टर ऑफिस के पास एक खाने की गाड़ी (Food Cart) खड़ी रहती है, जिससे आने वाली मसालों की खूशबू लोगों को अपनी ओर खींचती है। गजब बात ये है कि इस फूड कार्ट के पीछे कोई ‘मास्टर शेफ’ नहीं बल्कि दो इंजीनियर्स हैं, जो अपनी कॉर्पोरेट जॉब का काम खत्म करने के बाद ‘इंजीनियर्स ठेला’ चलाते हैं। उन्होंने मार्च 2021 में यह बिजनेस शुरू किया था, और चंद महीने में ही उनकी लजीज और फ्रेश बिरयानी बहुत से लोगों की फेवरेट हो गई!

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बचपन के दोस्तों का बिजनेस

 

सुमित सामल और प्रियम बेबर्ता बचपन के दोस्त हैं। दोनों पेशे से इंजीनियर हैं। जब कोरोना लॉकडाउन के कारण उन्हें अपने होम टाउन से दफ्तर का काम (वर्क फ्रॉम होम) करने का मौका मिला, तो दोनों ने ‘बिरयानी’ बेचने का फैसला किया। दरअसल, उन्हें यह आइडिया सड़क किनारे लगने वाले उन ठेलों से आया, जो दिनभर में सैकड़ों लोगों की भूख मिटाते हैं।

 

सड़क के ठेलों से आया आइडिया

 

प्रियम ने ‘द बेटर इंडिया’ को बताया, ‘हर कोई स्ट्रीट फूड पसंद करता है। बहुत से लोगों के लिए तो सिर्फ सड़क किनारे के ठेले ही भोजन का एकमात्र जरिया होते हैं। क्योंकि वह रेस्टोरेंट आदि में जाना अफोर्ड नहीं कर सकते। पर ठेलों के भोजन को लेकर लोगों के मन में साफ-सफाई, गुणवत्ता और स्वाद को लेकर दुविधा रहती है, जिसे ध्यान में रखते हुए हमने ‘इंजीनियर्स ठेला’ की शुरुआत की।

 

मां से बनानी सीखी बिरयानी

 

प्रियम ने बताया कि उनमें से कोई भी बिरयानी बनाने में माहिर नहीं था। इसलिए उन्होंने घर पर अपनी मां से ही बिरयानी पकाना सीखा। फिर दोनों ने डिश और अपना मेन्यू बनाने को लेकर खूब रिसर्च की और अंत में एक छोटा सा मेन्यू तैयार किया। इस बिजनेस के लिए शुरुआत में दोनों ने अपनी बचत से 50 हजार रुपये का निवेश किया।

 

क्वालिटी से नहीं करते समझौता

 

सबसे पहले उन्होंने दो खानसामों को काम पर रखा और रोजमर्रा के काम को चलाने के लिए एक कमरा भी किराए पर लिया। को-फाउंडर सुमित बताते हैं, ‘उनका आइडिया ऐसे व्यंजन (डिशेज) परोसने का था, जो घर पर बने खाने की तरह हो। इसलिए हम भोजन की क्वालिटी को सुनिश्चित करने के लिए उसकी निर्माण की हर प्रक्रिया पर कड़ी नजर रखते हैं। साथ ही, खाने से जुड़ा सारा सामान भी खुद ही बाजार से खरीद कर लाते हैं।’

 

दफ्तर के बाद चलाते हैं ‘ठेला

अब दोनों रोज शाम को दफ्तर का काम खत्म करने के बाद तय जगह पर अपने फूड कार्ट (खाने की गाड़ी) को खड़ा करते हैं। जहां लोगों को फुल प्लेट चिकन बिरयानी 120 रुपये और हाफ प्लेट 70 रुपये में मिलती है। अपने रोज के ग्राहकों के बीच छाने के बाद ‘इंजीनियर्स ठेला’ अब दिनभर में 100 से भी ज्यादा प्लेट बेचता है। और हां, उनका चिकन टिक्का भी लोगों की पसंद बन रहा है।

 

45 हजार तक हो रहा है मुनाफा

प्रियम ने बताया कि उनकी एक दिन की लागत 1 हजार रुपये है। जबकि कमाई 8 हजार रुपये तक होती है। वह कहते हैं कि ठेले पर होने वाले सभी खर्च को हटाने के बाद हमें महीने में 45 हजार रुपये का मुनाफा होता है। और हां, यह उनकी एक्स्ट्रा इनकम है, जो उनके दफ्तर की मंथली सैलरी से अलग

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