क्लिक कर जानिये स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए कैसे है प्राणघातक।

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नई दिल्ली।

क्लिक कर जानिये स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए कैसे है प्राणघातक।

नई दिल्ली। विज्ञान के अनेक चमत्कारपूर्ण आविष्कार प्रतिदिन होते रहते हैं। स्मार्ट फोन भी उनमें से एक ऐसा ही आविष्कार है। वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व के ताजा तरीन समाचार पल भर में एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंच जाते हैं। Image result for स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिएअनेक घटनाओं को तो हम अपने टी.वी. स्क्रीन पर जीवन्त होते हुए ही देख लेते हैं। वास्तव में यह एक अद्वितीय चमत्कार ही है। जरा सोचिए हमारी पीढ़ी पूर्व के व्यक्ति आज तक जीवित होते तो दैनिक जीवन में आये परिवर्तन को देखकर उनकी मन:स्थिति क्या होती? शायद वे किंकर्तव्यविमूढ़ होकर दांतों तले उँगली दबा लेते।

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आज प्रत्येक घर में हर सदस्य के पास स्मार्ट फोन है। घर के वरिष्ठ सदस्य अपने आवश्यक कार्य के लिए इनका उपयोग करते ही हैं, यह तो उचित है पर शिशु जो अपनी जननी की गोद में है वे भी स्मार्ट फोन को देखकर रोना बंद कर हँसने का उपक्रम करने लगते हैं।

माताएँ भी अपने ममता भरे हाथों से उन्हें स्मार्ट फोन दे देती हैं मानो कोई खिलौना है। वर्तमान में बाजार की हर वस्तु स्मार्ट फोन के माध्यम से ऑनलाइन क्रय की जाती है। न पर्स में पैसे रखने की झंझट, न घर से थैला ले जाने का कार्य। ऑनलाइन पेमेन्ट करो और मनचाही वस्तु आपके द्वार पर। आज से पाँच-दस वर्ष पूर्व हमें बाजार जाते समय साथ में नोटों की गड्डी लेना, खुल्ले पैसे का भी ध्यान रखना, जेब कतरों से सावधान रहना, थैले ले जाना, सारा सामान उठाना, टेम्पो -टेक्सी या सीटी बस की प्रतीक्षा करना, इसमें अच्छी खासी कसरत हो जाती थी। Image result for स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिएचार पहिया वाहन तो सभी के पास था नहीं। पैदल चलना और हाँफते हुए घर आना यही जीवन था। अध्ययन करने वाले बच्चे तो अपना अधिकांश गृह कार्य स्मार्ट फोन के माध्यम से ही करते हैं, वो इसका उपयोग खेल के लिए करते हैं। अभी कुछ समय पूर्व ‘ब्लू व्हेल गेम’ के कारण कई बालक अपना जीवन समाप्त कर चुके हैं। स्मार्ट फोन के माध्यम से बच्चे वे सब जानकारी प्राप्त कर लेते हैं, जिन्हें इस उम्र में अभी नहीं जानना चाहिये। इस कारण समाज में चारित्रिक पतन होता जा रहा है। नर्सरी तथा प्रायमरी कक्षा में पढऩे वाले बालक भी इससे अछूते नहीं हैं। हमारे समाज के प्रबुद्धवर्ग आगे आएं और इस नई स्मार्ट फोन पीढ़ी को पतन की और जाने से बचाएँ। माता-पिता को अपने लाड़ले-लाड़लियों के स्मार्ट फोन-ज्ञान पर गौरवान्वित नहीं होना चाहिए। उनका यह ज्ञान उन्हें पतन की ओर धकेल सकता है।

हायस्कूल तथा इससे बड़ी कक्षाओं में स्मार्ट फोन विद्यार्थियों के लिए अध्ययन में सहायक हो सकता है किंतु माध्यमिक स्तर तक के बच्चे मिट्टी के कच्चे घड़े के समान होते हैं। उन्हें तो इस डिवाइस से दूर ही रहना चाहिए। स्मार्ट फोन पर समय व्यतीत करने के बजाय यदि वे खेल के मैदान में शारीरिक खेल खेलेंगे तो वे तंदुरुस्त रहेंगे। उनका मानसिक व शारीरिक विकास भी होगा। खेल भावना का विकास होने से वे सक्षमतापूर्वक किसी समस्या का समाधान कर पायेंगे।Image result for स्मार्ट फोन छोटे बालकों के लिए तैराकी, संगीत, मलखंभ, कबड्डी, फुटबाल, क्रिकेट आदि खेलों की ओर पर्याप्त रुझान होने पर बालक स्वयं ही गजेट से दूरी बनाये रखेगा तथा उसका सीमित उपयोग करेगा। योग कक्षाओं में जाना, वहाँ योग सीखने से उनका शारीरिक तथा मानसिक विकास होगा। वे स्वस्थ रहेंगे। आने वाली पीढ़ी को भी अच्छा संदेश देंगे। स्मार्ट फोन ने बालकों की दिनचर्या को बिगाड़ दिया है।

देर रात तक गजेट पर आँखे गड़ाए सीरियल, कार्टून तथा फिल्म देखते रहना फिर प्रात: देर से सोना, जिससे उनकी पाचन क्रिया प्रभावित होती है। आंखों पर मोटा चश्मा लग जाता है। सम्पूर्ण शारीरिक क्रियाएँ अस्त-व्यस्त हो जाती हैं। देर रात तक जागरण करने के कारण कई बालक विद्यालयों में डेस्क पर सिर रखकर सोते हुए देखे जा सकते हैं।

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